#हरदोई:- कृष्ण जन्माष्टमी से पहले बेनीगंज बाजार में बढ़ी खीरे की मांग, जन्म के समय खीरा काटने की है अनोखी परंपरा#
#हरदोई:- कृष्ण जन्माष्टमी से पहले बेनीगंज बाजार में बढ़ी खीरे की मांग, जन्म के समय खीरा काटने की है अनोखी परंपरा#
#हरदोई: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर बाजारों में तैयारियां तेज हो गई हैं। आगामी 4 सितंबर को मनाई जाने वाली जन्माष्टमी को लेकर जहां मंदिरों और घरों में सजावट का दौर शुरू हो गया है, वहीं बेनीगंज की बाजार में जन्माष्टमी के एक दिन पहले ही विशेष प्रकार के खीरे की मांग बढ़ गई है। आम दिनों में सामान्य सब्जी के रूप में बिकने वाला खीरा जन्माष्टमी के अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है#
#श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर आधी रात भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय डंठल या ‘नार’ वाले खीरे को काटने की परंपरा कई क्षेत्रों में प्रचलित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खीरे का डंठल गर्भनाल का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि जिस प्रकार शिशु के जन्म के बाद नाल छेदन की प्रक्रिया होती है, उसी का प्रतीकात्मक स्वरूप भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय खीरे को काटकर किया जाता है#
#जन्माष्टमी की रात जैसे ही घड़ी में 12 बजते हैं, मंदिरों और घरों में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव शुरू होता है। भक्त भगवान का जन्म होने पर शंख-घंटे बजाते हैं, आरती करते हैं और बाल गोपाल का अभिषेक करते हैं। इसी दौरान परंपरा के अनुसार डंठल वाले खीरे को काटा जाता है#
#कई परिवारों में खीरे को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रतीक मानकर पूजा की थाली में रखा जाता है। कुछ स्थानों पर खीरे के भीतर या समीप बाल गोपाल की प्रतिमा रखकर जन्म की रस्म पूरी की जाती है। इसके बाद खीरे को काटने की परंपरा निभाई जाती है#
#जन्माष्टमी के एक दिन पहले बेनीगंज बाजार में नार वाले खीरे की मांग अचानक बढ़ गई है। दुकानदारों के अनुसार सामान्य दिनों की अपेक्षा जन्माष्टमी के अवसर पर लोग विशेष रूप से डंठल सहित ताजा खीरा खरीदने पहुंच रहे हैं। धार्मिक अनुष्ठान में इस्तेमाल होने के कारण इस समय ऐसे खीरे की कीमत भी सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है#
#बाजार में खीरा खरीदने पहुंचे श्रद्धालुओं का कहना है कि जन्माष्टमी की पूजा में अन्य पूजन सामग्री के साथ नार वाला खीरा भी खरीदा जाता है। रात में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय इसकी रस्म पूरी करने के बाद इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है#
#श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का पर्व ही नहीं, बल्कि इससे जुड़ी अनेक लोक परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं का भी उत्सव है। खीरा काटने की परंपरा भी इन्हीं मान्यताओं में से एक है। भक्त इसे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की प्रतीकात्मक प्रक्रिया से जोड़कर श्रद्धा के साथ निभाते हैं#
#जन्माष्टमी को लेकर बेनीगंज क्षेत्र के मंदिरों में भी विशेष तैयारियां की जा रही हैं। मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण के झूले सजाए जा रहे हैं और घरों में भी बाल गोपाल की पूजा-अर्चना के लिए तैयारियां चल रही हैं। शुक्रवार की आधी रात को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही श्रद्धालु जयकारों और भजनों के बीच जन्मोत्सव मनाएंगे#

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