इटावा:- से- ब्रेकिंग- न्यूज:- हर शिक्षा नीति का लक्ष्य रोजगार परक शिक्षा देना होना चाहिये, साल दर साल पढ़े लिखे युवा बेरोजगार पैदा करना बिल्कुल भी नही...
इटावा:- से- ब्रेकिंग- न्यूज:- हर शिक्षा नीति का लक्ष्य रोजगार परक शिक्षा देना होना चाहिये, साल दर साल पढ़े लिखे युवा बेरोजगार पैदा करना बिल्कुल भी नही...
हर हालत में नकल माफियाओं और उनसे जुड़े भृष्ट अधिकारियो पर रासुका लगाये सरकार तभी देश मे सुधरेगी शिक्षा व्यवस्था और सार्थक होगी कोई भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति...
देश मे 1964 में कोठारी आयोग के गठन से लेकर 1986 में जन्मी 1992 में बड़ी हुई व 2000 में सबको शिक्षा के मूल अधिकार के बिगुल बजाने के साथ ही 2020 में अब एक परिपक्व युवा बनकर हमारे सामने आई 34 साल की देश की नई युवा शिक्षा नीति का स्वागत है । लेकिन कुछ नये संशोधनों के साथ उसी पुरानी किताब पर नई जिल्द चढ़ी सी लग रही है आज की नई शिक्षा नीति । विकासशील हिंदुस्तान में कछुये की चाल से चल रही शिक्षा नीति को हिंदुस्तान में जवान होने मे अब तक 34 वर्ष लग गये और संग में कई युवाओं के सपने भी समय के साथ बूढ़े हो गये, अब जिस देश मे बूढ़े मां बाप की उम्मीदों की लाठी तोड़कर गली गली में उच्च शिक्षित युवा पढ़लिखकर घर बैठे हो या पढ़लिखकर किसी विभाग में आवेदन करने के बाद नौकरी के लिये सालों साल हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट के चक्कर ही लगा रहे हो वह देश क्या खाक आगे बढ़ेगा ,देश मे ऐसी शिक्षा नीति कही से भी सफल नही मानी जायेगी। क्यों कि जब युवाओं के पास सही उम्र में रोजगार ही नही होगा तो फिर स्कूल जाकर क ख ग का ककहरा पढ़ने से किसी के भी परिवार कभी पेट नही भरेगा । शिक्षा नीति तो ऐसी हो कि, भारत के युवाओ को अपने ही देश मे पढ़ लिखकर एक नौकरी के लिये न दर दर भटकना न पड़े । युवा और शिक्षा राष्ट्र निर्माण में सहायक है यह स्लोगन तो बस राजधानी के सरकारी कार्यालयों की दीवारों पर ही लिखा अच्छा लगता है। असल मे तो शिक्षा व्यवस्था शिक्षा माफियाओं के चंगुल की एक कठपुतली बन गई है । साथ मे कुछ भ्रष्ट नौकरशाही के पिस्सू अपने मखमल के बेड में नोट बिछाकर खुद खटमल बनकर शिक्षा की जड़ें और सरकार के ईमानदारी के सिस्टम को ही खोखला कर रहे है ।
नकल माफिया शिक्षा विभाग में किसी अमरबेल की तरह फैल चुका है। बुनियादी शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा में जड़े जमा चुके भ्रष्टाचार ने शिक्षित युवा के सपने तोड़ने का काम किया है। शिक्षकों के बिना शिक्षा की बात करना बेईमानी है। आज शिक्षक बिरादरी में भी दो धड़े दिखाई देते है सरकारी और प्राइवेट दौनो शिक्षक है दौनो के कार्य एक समान लेकिन बड़ी वेतन विसंगति देश के प्राइवेट विद्यालय में कार्यरत शिक्षित युवा को कही न कहीं कुंठित कर रही है।
देश मे शिक्षा का मूल अधिकार कानून तो बना लेकिन शिक्षित व्यक्ति को एक निर्धारित उम्र के पड़ाव के बाद सरकारी नौकरी देने का कोई भी कानून इस देश मे नही बना यह शिक्षा नीति की एक बड़ी कमी है। अब नौकरी की निर्धारित उम्र निकलने के बाद अपनी दिन रात पढ़कर कमाई गई उच्च शिक्षा की डिग्री का वह क्या करे अपनी जीवन की बहुमूल्य कमाई शिक्षा दीक्षा को वह उम्रदराज होकर कहा ले जाये। अपने परिवार का पालन पोषण कैसे करे? सरकार के पास इस बिंदु के लिये कोई ठोस नीति ही नही है। यह देश के भावी भविष्य या अनुसंधान कार्यक्रम के लिये कोई अच्छी बात भी नही है। अब इन परिस्थितियों व ससमस्याओ में अभिभावकों का उच्च शिक्षा से ही मोह भंग हो रहा है। जिस उच्च शिक्षा की डिग्री से देश के युवा को नौकरी नही मिलेगी वह फिर उस कोर्स मे भला दाखिला ही क्यों लेगा । जहाँ भविष्य ही अंधकारमय हो।
असल में मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय रखने से नही बल्कि, पढ़े लिखे उच्च शिक्षित बेरोजगारों की उच्च शिक्षा की डिग्री को समयानुसार वरीयता देकर नौकरी की शक्ल में बदलने का कोई सार्थक प्रयास शिक्षा नीति में होता तो शायद यह नई शिक्षा नीति लोगो को ज्यादा ही खूबसूरत नजर आती। आज देश के पढ़े लिखे मेहनती युवा एक नौकरी के इंतज़ार में घरों में ही समय से पहले बूढ़े हो रहे है या फिर किसी मानसिक अवसाद में चले जा रहे है उनके अभिभावक भी अपने जीवन की गाढ़ी कमाई अपने बच्चो की पढ़ाई में लगा चुके है । जिसका ब्याज भी निकलने की कोई उम्मीद नही । अब बस अपनी बूढ़ी पथराई आंखों से वर्तमान शिक्षा नीति को कोसते ही नजर आते है। क्यों की देखा जाये तो असल में किसी भी शिक्षा नीति का आंकलन बस जनता ही तय कर सकती है सरकार में बैठा कोई भी चापलूस नेता या अधिकारी नही । क्यों कि किस गुलाब के फूल में कितने कांटे लगे है यह जनता के सिवा सरकार को कोई भी गिनकर नही बतायेगा । हमारे देश मे शिक्षा नीति आधुनिक अवश्य हो अच्छी बात है लेकिन, शत प्रतिशत रोजगारोन्मुख भी हो केवल बेरोजगार पैदा करने वाली न हो यह बात बेहद ज्यादा ध्यान देने वाली है। उम्मीद है कि मेरी यह बात आप सभी के सहयोग से सरकार तक अवश्य पहुंचेगी।
*डॉ आशीष त्रिपाठी*पूर्व असिस्टेंस प्रोफेसर (जन्तु विज्ञान विभाग) जनता कालेज बकेवर,
रिपोर्टर: इटावा से- खोज जारी है न्यूज चैनल की खास रिपोर्ट...
हर हालत में नकल माफियाओं और उनसे जुड़े भृष्ट अधिकारियो पर रासुका लगाये सरकार तभी देश मे सुधरेगी शिक्षा व्यवस्था और सार्थक होगी कोई भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति...
देश मे 1964 में कोठारी आयोग के गठन से लेकर 1986 में जन्मी 1992 में बड़ी हुई व 2000 में सबको शिक्षा के मूल अधिकार के बिगुल बजाने के साथ ही 2020 में अब एक परिपक्व युवा बनकर हमारे सामने आई 34 साल की देश की नई युवा शिक्षा नीति का स्वागत है । लेकिन कुछ नये संशोधनों के साथ उसी पुरानी किताब पर नई जिल्द चढ़ी सी लग रही है आज की नई शिक्षा नीति । विकासशील हिंदुस्तान में कछुये की चाल से चल रही शिक्षा नीति को हिंदुस्तान में जवान होने मे अब तक 34 वर्ष लग गये और संग में कई युवाओं के सपने भी समय के साथ बूढ़े हो गये, अब जिस देश मे बूढ़े मां बाप की उम्मीदों की लाठी तोड़कर गली गली में उच्च शिक्षित युवा पढ़लिखकर घर बैठे हो या पढ़लिखकर किसी विभाग में आवेदन करने के बाद नौकरी के लिये सालों साल हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट के चक्कर ही लगा रहे हो वह देश क्या खाक आगे बढ़ेगा ,देश मे ऐसी शिक्षा नीति कही से भी सफल नही मानी जायेगी। क्यों कि जब युवाओं के पास सही उम्र में रोजगार ही नही होगा तो फिर स्कूल जाकर क ख ग का ककहरा पढ़ने से किसी के भी परिवार कभी पेट नही भरेगा । शिक्षा नीति तो ऐसी हो कि, भारत के युवाओ को अपने ही देश मे पढ़ लिखकर एक नौकरी के लिये न दर दर भटकना न पड़े । युवा और शिक्षा राष्ट्र निर्माण में सहायक है यह स्लोगन तो बस राजधानी के सरकारी कार्यालयों की दीवारों पर ही लिखा अच्छा लगता है। असल मे तो शिक्षा व्यवस्था शिक्षा माफियाओं के चंगुल की एक कठपुतली बन गई है । साथ मे कुछ भ्रष्ट नौकरशाही के पिस्सू अपने मखमल के बेड में नोट बिछाकर खुद खटमल बनकर शिक्षा की जड़ें और सरकार के ईमानदारी के सिस्टम को ही खोखला कर रहे है ।
नकल माफिया शिक्षा विभाग में किसी अमरबेल की तरह फैल चुका है। बुनियादी शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा में जड़े जमा चुके भ्रष्टाचार ने शिक्षित युवा के सपने तोड़ने का काम किया है। शिक्षकों के बिना शिक्षा की बात करना बेईमानी है। आज शिक्षक बिरादरी में भी दो धड़े दिखाई देते है सरकारी और प्राइवेट दौनो शिक्षक है दौनो के कार्य एक समान लेकिन बड़ी वेतन विसंगति देश के प्राइवेट विद्यालय में कार्यरत शिक्षित युवा को कही न कहीं कुंठित कर रही है।
देश मे शिक्षा का मूल अधिकार कानून तो बना लेकिन शिक्षित व्यक्ति को एक निर्धारित उम्र के पड़ाव के बाद सरकारी नौकरी देने का कोई भी कानून इस देश मे नही बना यह शिक्षा नीति की एक बड़ी कमी है। अब नौकरी की निर्धारित उम्र निकलने के बाद अपनी दिन रात पढ़कर कमाई गई उच्च शिक्षा की डिग्री का वह क्या करे अपनी जीवन की बहुमूल्य कमाई शिक्षा दीक्षा को वह उम्रदराज होकर कहा ले जाये। अपने परिवार का पालन पोषण कैसे करे? सरकार के पास इस बिंदु के लिये कोई ठोस नीति ही नही है। यह देश के भावी भविष्य या अनुसंधान कार्यक्रम के लिये कोई अच्छी बात भी नही है। अब इन परिस्थितियों व ससमस्याओ में अभिभावकों का उच्च शिक्षा से ही मोह भंग हो रहा है। जिस उच्च शिक्षा की डिग्री से देश के युवा को नौकरी नही मिलेगी वह फिर उस कोर्स मे भला दाखिला ही क्यों लेगा । जहाँ भविष्य ही अंधकारमय हो।
असल में मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय रखने से नही बल्कि, पढ़े लिखे उच्च शिक्षित बेरोजगारों की उच्च शिक्षा की डिग्री को समयानुसार वरीयता देकर नौकरी की शक्ल में बदलने का कोई सार्थक प्रयास शिक्षा नीति में होता तो शायद यह नई शिक्षा नीति लोगो को ज्यादा ही खूबसूरत नजर आती। आज देश के पढ़े लिखे मेहनती युवा एक नौकरी के इंतज़ार में घरों में ही समय से पहले बूढ़े हो रहे है या फिर किसी मानसिक अवसाद में चले जा रहे है उनके अभिभावक भी अपने जीवन की गाढ़ी कमाई अपने बच्चो की पढ़ाई में लगा चुके है । जिसका ब्याज भी निकलने की कोई उम्मीद नही । अब बस अपनी बूढ़ी पथराई आंखों से वर्तमान शिक्षा नीति को कोसते ही नजर आते है। क्यों की देखा जाये तो असल में किसी भी शिक्षा नीति का आंकलन बस जनता ही तय कर सकती है सरकार में बैठा कोई भी चापलूस नेता या अधिकारी नही । क्यों कि किस गुलाब के फूल में कितने कांटे लगे है यह जनता के सिवा सरकार को कोई भी गिनकर नही बतायेगा । हमारे देश मे शिक्षा नीति आधुनिक अवश्य हो अच्छी बात है लेकिन, शत प्रतिशत रोजगारोन्मुख भी हो केवल बेरोजगार पैदा करने वाली न हो यह बात बेहद ज्यादा ध्यान देने वाली है। उम्मीद है कि मेरी यह बात आप सभी के सहयोग से सरकार तक अवश्य पहुंचेगी।
*डॉ आशीष त्रिपाठी*पूर्व असिस्टेंस प्रोफेसर (जन्तु विज्ञान विभाग) जनता कालेज बकेवर,
रिपोर्टर: इटावा से- खोज जारी है न्यूज चैनल की खास रिपोर्ट...

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