#@नजर के चश्मे बनाने, बेचने की दुकान खोले बैठे हैं कुछ अंधे@#.
#@नजर के चश्मे बनाने, बेचने की दुकान खोले बैठे हैं कुछ अंधे...
#@2019 में लगभग 44% (27 करोड़) वोट लेकर बनी दो तिहाई बहुमत वाली जिस सरकार का *प्रधानमंत्री 4.8 लाख वोट से* चुनाव जीता है, *गृहमंत्री 5.60 लाख*, *रक्षामंत्री 3.47 लाख* और *कृषि मंत्री 1.33 लाख वोट से* चुनाव जीत कर आए हैं...
#@उस सरकार और उसके इन मंत्रियों से आज यह पूछा जा रहा है कि देश के किसानों के बारे में तुम लोग कोई फैसला कैसे कर सकते हो...
#@अपना फैसला वापस लो और हम जो कह रहे हैं वो करो. आज जो लोग ऐसा कह रहे हैं उनकी सामाजिक राजनीतिक हैसियत पर भी एक निगाह डालिए...
#@अपने गृह जनपद की मुजफ्फर नगर सीट पर *मात्र दस हजार वोट पाकर* 6.43 लाख वोटों से लोकसभा चुनाव हार चुका *राकेश टिकैत* सरकार का फैसला बदलवा कर अपना फैसला लाद देने की जिद्द में बावला हो रहा है...
#@अपनी अब तक की जिन्दगी में केवल एक चुनाव लड़ा और- 5.65 लाख वोटों से हार कर अपनी जमानत जब्त करा चुका योगेन्द्र यादव* भी सरकार का फैसला बदलवा कर देश के किसानों पर अपना फैसला लदवा देने के नशे में धुत्त होकर बौराया बौराया घूम रहा है...
#@दिल्ली विधानसभा के चुनाव में ओखला सीट पर *केवल 180 वोट पाया तस्लीम रहमानी* भी रोज शाम को किसानों का ठेकेदार बनकर न्यूजचैनलों पर आ जाता है और नए कृषि कानून को बदलने की मांग करते हुए छटपटाने लगता है...
#@नेपोलियन बोनापार्ट को भाग्य का लाडला कहा जाता है
लेकिन हमारा प्रधान सेवक ! उसकी तरफ भी तो देखो वह क्या कम है...
जिसने कभी पराजय का स्वाद नहीं चखा
#@और जब बना, तो विधायक नहीं सीधे मुख्यमंत्री बना और सिर्फ सांसद नहीं सीधे प्रधानमंत्री बना...
यह जो फूटी कौड़ी की हैसियत वाले टुच्चे लोग किसानों की हमदर्दी लेकर ,नेता बनकर अपनी राजनीति चमकाने आ गए हैं आप लिख कर रखो कुछ समय के बाद यह लोग दिल्ली में तो क्या गूगल पर भी ढूंढे नहीं मिलेंगे क्योंकि मोदी की किस्मत और काबिलियत दोनों बुलंदी पर है ।
गर्व हे ऐसे महान प्रधानमन्त्री पर...

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