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#हरदोई:- नरेश अग्रवाल और नितिन अग्रवाल के दुर्ग को क्या भेद पाएंगे अनिल वर्मा#


#हरदोई:- नरेश अग्रवाल और नितिन अग्रवाल के दुर्ग को क्या भेद पाएंगे अनिल वर्मा#

#हरदोई उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर जहां सरगर्मियां जोर है वहीं हरदोई जिले की सबसे चर्चित सीट मानी जाने वाली सदर विधानसभा को लेकर सभी पार्टियों द्वारा गंभीर मंथन किया जा रहा है कि लगातार सत्ता में रहने वाले नरेश अग्रवाल और उनके पुत्र नितिन अग्रवाल को उनकी ही विधानसभा सीट पर किस प्रत्याशी द्वारा करारी टक्कर दी जाएगी जिसको लेकर जल्द ही सपा में शामिल हुए अनिल वर्मा को टिकट मिलने की संभावना जोरों शोरों से की जा रही हैं अब देखना यह होगा कि सपा सदर विधानसभा सीट पर जातीय आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए टिकट का बंटवारा करेगी या जिताऊ कैंडिडेट को टिकट देकर रणनीति बनाएगी

#अनिल वर्मा का अब तक का राजनीतिक सफर#

#अनिल वर्मा मूल रूप से बावन विकास खंड की ग्राम पंचायत सारंगापुर के निवासी हैं। वर्ष 1991-92 शिक्षा सत्र में सीएसएन डिग्री कालेज छात्रसंघ के अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। उनके चाचा छोटेलाल वर्ष 1993 में बसपा और 1996 में भाजपा के टिकट पर तत्कालीन बावन-हरियावां सीट से विधायक चुने गए थे। 1999 में उनके निधन के बाद उपचुनाव हुआ था। तब भाजपा के टिकट पर अनिल वर्मा पहली बार चुनाव लड़े थे, लेकिन बसपा प्रत्याशी शिव प्रसाद वर्मा से 1200 वोट से हार गए थे। वर्ष 2002 के आम चुनाव में अनिल भाजपा के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद सीधे 2012 का चुनाव उन्होंने सपा के टिकट पर बालामऊ सीट से लड़ा और जीत हासिल की। वर्ष 2017 का चुनाव भी अनिल वर्मा ने नहीं लड़ा था#

#सदर विधानसभा के जातीय आंकड़ों#

#सदर विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक मतदाता पासी बिरादरी के हैं। कुल मतदाताओं के 15.17 फीसदी मतदाता पासी बिरादरी के हैं। अनिल वर्मा इसी बिरादरी से आते हैं। इसके अलावा 7.57 फीसदी मुस्लिम, 4.06 फीसदी यादव और 10.32 फीसदी रैदास मतदाता भी इस क्षेत्र में निर्णायक की भूमिका में हैं। इसी क्षेत्र में ब्राह्मण 10.84 फीसदी, 14.92 फीसदी क्षत्रिय और 4.87 फीसदी बनिया मतदाता भी हैं। इन आंकड़ों पर गौर करने के बाद ही अनिल सपाई हुए और सपा ने भी उन्हें हाथों हाथ लिया#

#नरेश और नितिन को घेरने की कोशिश बहुत हुईं, मगर अभेद्य ही रहा दुर्ग#

#सदर विधानसभा क्षेत्र की बात की जाए तो यह नरेश और नितिन का अभेद्य दुर्ग ही रहा है। कई बार नरेश अग्रवाल और नितिन अग्रवाल को घेरने की कोशिश हुई, लेकिन अब तक यह कोशिशें सफल नहीं हुईं। नरेश अग्रवाल वर्ष 1980,1989, 1991, 1993, 1996, 2002 और 2007 में इस सीट से विधायक चुने गए। वर्ष 1991 की राम लहर में बेहद नजदीकी मुकाबला हुआ था और तब भी नरेश अग्रवाल 1017 वोटों से चुनाव जीत गए थे। नितिन अग्रवाल 2008 के उपचुनाव में और 2012 व 2017 के चुनाव में विधायक निर्वाचित हुए। 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के राजाबख्श सिंह को लगभग पांच हजार वोटों से हराया था। अब तो नरेश अग्रवाल और सदर विधायक नितिन अग्रवाल भी भाजपा ने शामिल है और संभावित टिकट नितिन अग्रवाल को ही मिलने की संभावना जताई जा रही हैं अब देखना यह होगा कि सपा किस प्रत्याशी पर दांव लगाकर सदर विधानसभा सीट जीत पाएगी#

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