Breaking News

#हरदोई:- बेनीगंज- स्वधर्म सभी को कामधेनु की तरह इच्छित फल देने वाला है-आचार्य#


#हरदोई:- बेनीगंज- स्वधर्म सभी को कामधेनु की तरह इच्छित फल देने वाला है-आचार्य#

#हरदोई: बेनीगंज- नगर के सीबीजी ऑफ साइंस इण्टर कॉलेज में 23वीं सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा के समापन पर रविवार शाम को कथा ब्यास धन्वंतरि महाराज ने कहा कि अपना जो स्व धर्म है, उसी का नाम नित्य यज्ञ है। जिसका पालन करने में भय और पाप लेश मात्र भी नहीं रहता।जब मनुष्य इस परम सुख देने वाले धर्म को त्याग कर अनेक झूठे और ऊट पटाँग धर्मो में लग जाता है, तो वह नित्य भयभीत ही रहता है और इसलिए जन्म मरण के चक्कर में घूमता है।इस स्वधर्म में न तीर्थ, व्रत, पूजा पाठ की ही आवश्यकता है न यज्ञ आदि बाह्य क्रियाओं के करने की ही आवश्यकता है।स्वधर्म सभी को कामधेनु के समान इच्छित पदार्थ देने वाला है।इसलिए मनुष्य के लिए स्वधर्म का आचरण करना ही परम लाभदायक है।भगवान के वचनों को ध्यानपूर्वक सुनता हुआ अर्जुन भगवान से प्रश्न करते हुए कहता है।हे प्रभु जो पुरूष माया की ओर से पीठ फेर कर आपके ध्यान में ही मगन रहना चाहता है और पाप कर्म नहीं करना चाहता है वह बलात् किसकी प्रेरणा से पाप कर्मो का आचरण करता है।भगवान श्री कृष्ण कहते है।हे अर्जुन रजोगुण से उत्पन्न होने वाले काम और क्रोध ही महान पापी है।इन्हीं को अपना सबसे बड़ा बैरी समझना चाहिए और अग्नि घी, सामग्री और सूखी लकड़ियों के डालने से कभी तृप्त नहीं होती।वैसे ही इन्द्रियों के विषय भरपूर देने पर भी काम कभी तृप्त नहीं होता।काम, काल के समान निष्ठुर है,जो ज्ञान को इसी प्रकार ढके रहता है, जिस प्रकार धुएं से अग्नि, जेर से गर्भ, बादल से सूर्य और काई से जल ढका रहता है।काम क्रोध आदि बादलों से ज्ञान रूपी सूर्य के ढ़क जानें से मन में अज्ञान रूपी अंधेरा रहता है।काम की ज़ब एक बार जिस किसी को भूख लग जाती है तो सारा विश्व मिल जाने पर भी उसकी भूख दूर नहीं होती।जिस प्रकार चन्दन से सांप लिपटे रहते हैँ, वैसे ही काम क्रोध आदि सब प्राणियों के शरीरों में चिपटे हुए हैँ।वे भक्ति और ज्ञान को लूटने वाले डाकू और चोर है जो ह्रदय में छिपे बैठे रहते हैँ और समय-समय पर अपना काम करते रहते हैँ। ज्ञान दर्पण की तरह स्वयं शुद्ध होने पर भी इनमें मैला नजर आता है। इनको दूर करने के लिए जितने भी बाह्य साधन किए जायेँगे ये उतना ही बलवान होते रहते हैँ। इन्द्रियां और मन इन सबके रहने के स्थान हैँ। इनकी तृप्ति के लिए इन्द्रियों में स्फूर्ति अर्थात कर्म करने की इच्छा उत्पन्न होती है। मन और इन्द्रियों से ये वही कर्म कराते हैँ जिससे लोभ मोह की बृद्धि हो जावे#

#तुलसीदास जी कहते हैँ कि काम क्रोध आदि नर्क में ले जाते हैँ। यह हठ या जबरदस्ती करने से काबू में नहीं आते। गेंद को जितना भी दबाया जायेगा वह उतनी ही अधिक उछलती है। हठयोगियों को यह काम, क्रोध बड़ा ही परेशान और दुखी करते हैँ पर भगवान का चिन्तन करने से ये अपने आप शान्त हो जाते हैँ। कथा समाप्ति के दौरान विद्यालय के प्रधानाचार्य गृजेश चंद्र तिवारी व कथाव्यास धनवन्तरि ने उपस्थित पत्रकारों को अंग वस्त्र भेट कर सम्मानित किया। श्री तिवारी ने कहा कि भारत के चौथे स्तम्भ कहे जाने वाले सभी पत्रकार भाइयो ने कार्यक्रम को बड़े ही प्रमुखता से अपने समाचार पत्रों मे प्रकाशित किया है। आप सभी लोगो का मै और मेरी विद्यालय की टीम धन्यवाद देती है। और आपसे आशा करती है कि आप ऐसे ही निरंतर प्रयास समाज के लिए करते रहे।इस मौके पर मृदुल दिवेदी, पीयूष तिवारी, संजय द्विवेदी, शिवम गुप्ता, अमन गुप्ता, देवसेन अवस्थी, अवनीश दिवेदी, अभय त्रिवेदी, अंकुल शुक्ला, अंकित अग्निहोत्री आदि मौजूद रहे#

खोज जारी है.24×7 न्यूज चैनल/ हिन्दी दैनिक समाचार पत्र की खास रिपोर्ट...

No comments