#रायबरेली:- पुलिस, वन विभाग की मिलीभगत! आखिर थमेगा हरे प्रतिबंधित पेड़ों पर चल रहा आरा, वन माफियाओं के आरा को पुलिस का संरक्षण क्यों! क्या पुलिस नही चाहती कि हमारा पर्यावरण बेहतर रहे#
#रायबरेली:- पुलिस, वन विभाग की मिलीभगत! आखिर थमेगा हरे प्रतिबंधित पेड़ों पर चल रहा आरा, वन माफियाओं के आरा को पुलिस का संरक्षण क्यों! क्या पुलिस नही चाहती कि हमारा पर्यावरण बेहतर रहे#
#रायबरेली: आखिरकार जनपद का वन विभाग व पुलिस विभाग हमारे बीच हरे हरे पेड़ों का सफाया करवाकर पर्यावरण को खराब करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा है, तभी तो आए दिन किसी न किसी रायबरेली के थाना क्षेत्र में हरे पेड़ों पर पर माफियाओं का आरा चलता देखा जा सकता है। ज्ञात हो कि एक तरफ यूपी सरकार वृक्ष लगाओ अभियान में करोड़ों रुपए खर्च करती है वहीं दूसरी तरफ वन माफिया सरकार के मंसूबे में पानी फिरते नजर आते हैं ऐसा क्यों! हमारे बीच से साफ हो रहे हरे पेड़ों का एक मामला रायबरेली के हरचंदपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत सोहलिया का प्रकाश में आया है जहां पर वन माफिया द्वारा हरे प्रतिबंधित महुआ नीम के हरे पेड़ों को निशाना बनाया जा रहा है, सिरसा घाट से एक किलोमीटर पहले सोहलिया चौराहे के पास हाईवे के किनारे दबंग ठेकेदार द्वारा हरे महुआ के पेड़ में नीम के पेड़ों को काटकर दिन के उजाले में ले जाया जा रहा है लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है, दिन के उजाले में हाईवे के किनारे से हरे प्रतिबंधित पेड़ों को काटना तो कहीं ना कहीं पुलिस विभाग और वन विभाग की मिलीभगत से काम चल रहा है लेकिन सरकार वृक्ष लगाओ अभियान चला रही है और करोड़ों रुपए का खर्च भी कर रही है लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से हरे पेड़ों को जिस तरह से निशाना बनाया जा रहा है तो कहीं ना कहीं सरकार की मंशा पर पानी फेरने का काम वन माफिया कर रहे हैं लेकिन जिनके कंधों पर जिम्मेदारी की कमान सौंपी गई है वही चंद रुपयों के लिए खुलेआम दिन के उजाले में पेड़ काटने देते हैं यदि इसकी शिकायत किसी भी जिम्मेदार अधिकारी से की जाती है तो दिखवा लेने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं तो कहीं ना कहीं पुलिस विभाग और वन विभाग की मिलीभगत से हरे प्रतिबंधित पेड़ों को काटा जा रहा है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो जल्द ही हमारे बीच से हरे पेड़ों के सफाया के बाद हमारे पर्यावरण में सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा#

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