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#हरदोई:- वैभव का क्रूर अंत- अंतत वही हुआ जिसका भय था#


#हरदोई:- वैभव का क्रूर अंत- अंतत वही हुआ जिसका भय था#

#हरदोई: हालांकि एक पत्रकार होने के नाते प्रत्येक घटना मेरे लिए समाचार ही है और किसी भी अपराधिक घटना के बहाने से पुलिस और सरकार की कानून व्यवस्था पर प्रश्न खड़े करने का अवसर भी मिल जाता है। परंतु एक संवेदनशील नागरिक होने के नाते मैं कतई नहीं चाहता था कि बिलासपुर कस्बे के व्यापारी अरुज सिंघल के इकलौते पुत्र वैभव की हत्या का समाचार सच हो। मैं ईश्वर से प्रार्थना कर रहा था कि वह सही सलामत वापस आ जाए। परंतु ऐसा नहीं हुआ और पहले दिन से जताई जा रही आशंका सच साबित हो गई। उसकी मृत देह आज सुबह गंगनहर से चचूरा गांव के निकट बरामद हुई। क्या उसकी हत्या उसके लापता होने के दिन 30 जनवरी को ही कर दी गई थी? इस प्रश्न का उत्तर पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से मिलेगा। एक प्रश्न यह भी है कि यदि उसी दिन उसकी हत्या कर दी गई थी तो क्या उसे उसी दिन नहर में फेंक दिया गया था?उसका शव देखने वाले लोग इसी प्रकार के प्रश्नों को लेकर चर्चा कर रहे हैं। पुलिस के लिए यह उपलब्धि भी है और नाकामी भी है।चार दिन पहले बिलासपुर में धरना दे रहे परिजनों और कस्बे के लोगों ने पुलिस को 12 फरवरी तक का समय दिया था। पुलिस ने समय-सीमा से एक दिन पहले ही शव खोज निकाला परंतु आरोपियों के प्रति पुलिस की नरमी के कारण अभी भी अज्ञात हैं। हालांकि किसी घटना को सुलझाने के लिए पुलिस का काम करने का तरीका कोई और तय नहीं कर सकता है। बहरहाल गत 30 जनवरी से लापता लगभग 17 वर्षीय वैभव का आज शाम पोस्टमॉर्टम के बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया। इसके साथ ही परिजनों का यह असमंजस समाप्त हो गया कि वह जीवित है या नहीं। अब पुलिस पर यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वैभव की हत्या करने वाले निर्मम हत्यारों को कानून की जद में अधिकतम सजा दिलवाने का प्रयास करे। किसी के घर के चिराग को एक फूंक से बुझा देना कोई मजाक तो नहीं है। नेकदृष्टि#

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