#हरदोई:- मल्लावां- विकास के नाम पर 50 लाख रुपए का बंदरबांट करने की तैयारी#
#हरदोई:- मल्लावां- विकास के नाम पर 50 लाख रुपए का बंदरबांट करने की तैयारी#
#रिजेक्ट ईंटो से हो रहा निर्माण, भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही कार्ययोजनाएं#
#हरदोई: विकास खंड मल्लावां के ग्राम पंचायत गंज जलालाबाद में विकास के नाम पर भ्रष्टाचार की योजनाएं तेजी से संचालित की जा रही हैं, इसमें नागरिकों का हित भले ही न हो पर सरकारी हुक्मरानो की चांदी कट रही है। प्रशासन की नाक के नीचे 50 लाख रुपये की सरकारी धनराशि का जिस तरह 'बंदरबांट' हो रहा है, उसने प्रशासनिक शुचिता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं#
#विरासत का अपमान और सत्ता का प्रतिशोध#
#ग्रामीण बताते हैं कि गंज जलालाबाद में 35 वर्षों तक विकास का सूरज नहीं उगा था। स्वर्गीय प्रेमलता दीक्षित ने जब ग्राम प्रधान के रूप में कमान संभाली, तो गांव की सूरत बदलने लगी थी। उनके निधन के बाद जनता ने भारी बहुमत से उनके पुत्र अभिषेक दीक्षित को इस उम्मीद में चुना कि वे अपनी माता के विजन को साकार करेंगे। लेकिन अभिषेक की कार्यशैली और विकास की गति कुछ स्थानीय 'माननीयों' को हजम नहीं हुई। आरोप है कि माननीय ने अपनी राजनीतिक जमीन खिसकते देख सत्ता का वह नंगा-नाच दिखाया, जिसकी मिसाल मिलना मुश्किल है। बेबुनियाद आरोपों की बिसात बिछाई गई और षड्यंत्रपूर्वक प्रधान के वित्तीय अधिकार सीज कर दिए गए। यह कार्रवाई केवल एक प्रधान के खिलाफ नहीं, बल्कि उस जनमत के खिलाफ है जिसने उसे चुना था#
#विकास समिति' के नाम पर फर्जीवाड़े का खेल#
#प्रधान को बेदखल करने के बाद प्रशासन ने जिस 'विकास समिति' का गठन किया, वह भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा हथियार बन गई है। सूत्रों का दावा है कि प्रधान अभिषेक दीक्षित द्वारा तैयार की गई मास्टर-प्लान कार्ययोजना को चुराकर उस पर काम तो शुरू किया गया, लेकिन उसकी गुणवत्ता को निकाल फेंका गया। कार्यों की हकीकत बयां करने के लिए ये तस्वीरें काफ़ी हैं। निर्माण में प्रयुक्त इंटरलॉकिंग ईंटें किसी प्रतिष्ठित फर्म के बजाय उसी ग्राम के एक रसूखदार की फर्जी भट्टी से आ रही हैं जो ईंटें बाजार में रिजेक्ट कर दी गई थीं, उन्हें गंज जलालाबाद की सड़कों पर बिछाकर सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है#

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