#हरदोई:- मुख्यमंत्री कार्यालय तक लगाई फरियाद! फिर भी न्याय की नहीं आस, राजस्व विभाग उदासीन, यूपी पुलिस लगवा रही थानों के चक्कर#
#हरदोई:- मुख्यमंत्री कार्यालय तक लगाई फरियाद! फिर भी न्याय की नहीं आस, राजस्व विभाग उदासीन, यूपी पुलिस लगवा रही थानों के चक्कर#
#हरदोई: राजधानी में प्लॉट बिक्री के नाम पर फर्जीवाड़ा जारी है, और जिम्मेदार बेखबर हैं, जबकि वे शपथ पत्र भी झूठे साबित हो रहे हैं जिन पर बैनामा और रजिस्ट्री कराई जाती है। प्रॉपर्टी डीलर और रजिस्ट्री दफ्तर के कर्मचारियों की मिलीभगत से लोगों को प्लॉट बेचने के नाम पर लाखों और करोड़ों ठग लिए जाते हैं जबकि उन्हें क्रय की गई भूमि नहीं मिल पाती है, हैरानी वाली बात तो ये है कि ऐसे मामलों न तो पीड़ित की कहीं सुनवाई होती है और न ही एफआईआर दर्ज की जाती है। जब मुख्यमंत्री कार्यालय में फरियाद लगाई तो लखनऊ के बजाय हरदोई एसपी को शिकायत भेज दी गई#
#ताज़ा मामला राजधानी लखनऊ के #मोहनलालगंज इलाके का है। #हरदोई के पुलिस लाइन निवासी प्रेम सिंह ने बताया कि उसने बीते 16 अक्तुबर 2018 को रिप्ले टेक्नोलॉजी प्रा० लि० चतुर्थ तल साइबर हाईटस विभूति खंड गोमती नगर द्वारा अधिकृत विक्रेता से गाटा संख्या 948 रकबा 0.481 हेक्टेयर का अंश में से रामसा प्रोजेक्ट प्लाट से ई-2, ई-3 रकबा 2000 वर्ग फिट स्थिति भूमि भौराकला परगना व तहसील मोहनलालगंज-लखनऊ (0108) सड़क स्थिति मोहनलालगंज गोसाईगंज मार्ग से 1 किमी से अधिक दूरी पर स्थिति है जिसका #रजिस्ट्री कार्यालय लखनऊ में बैनामा कराया था#
#उक्त विक्रेता ने कहा था कि वह प्लॉट पर कब्जा करा देगा, जबकि कई बार दौड़ भाग करने पर भी वह टाल-मटोल करता रहा है, जिसके बाद विक्रेता ने अपना फोन भी बंद कर लिया। पीड़ित प्रेम सिंह का कहना है कि प्लॉट विक्रेता ने उसके साथ धोखाधड़ी की है। प्लाट पर कब्जा न मिलने से वह मानसिक रूप से काफी परेशान है। पूर्व में कई प्रार्थना उच्च अधिकारियों को दिए किन्तु कोई कार्यवाही नही हुयी। मोहनलालगंज पुलिस उसे डीलर के कार्यालय से सम्बंधित गोमती नगर थाने भेजती है, और गोमतीनगर पुलिस उसे प्लाट से सम्बंधित थाने मोहनलालगंज भेज देती है। अभी हाल ही में जब प्रेम सिंह ने मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई तो वहां से शिकायत लखनऊ पुलिस के बजाय हरदोई एसपी को फॉरवर्ड कर दी गई। न्याय की आस में दौड़ते दौड़ते पीड़ित परेशान हो चुका है, और न्याय की उम्मीद भी ख़त्म समझ रहा है#

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