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#हरदोई:- परमार्थ में तप कर जीवन बनता कुन्दन- शिवशरण, अरणी मंथन से प्रज्ज्वलित हुई महायज्ञ की अग्नि धर्म रक्षा हेतु हर युद्ध उचित- आचार्य शिवम, 28 मई को कथा विश्राम, 29 को महायज्ञ पूर्णाहुति, 30 मई को भण्डारा- प्रसाद#


#हरदोई:- परमार्थ में तप कर जीवन बनता कुन्दन- शिवशरण, अरणी मंथन से प्रज्ज्वलित हुई महायज्ञ की अग्नि धर्म रक्षा हेतु हर युद्ध उचित- आचार्य शिवम, 28 मई को कथा विश्राम, 29 को महायज्ञ पूर्णाहुति, 30 मई को भण्डारा- प्रसाद#

#हरदोई: शतचण्डी महायज्ञ की अरणी मंथन से अग्नि प्रज्ज्वलित. श्रीमद्भागवकथा ने जायज ठहराया धर्म रक्षा हेतु युद्ध. श्रीरामकथा में बिखरा परमार्थ का संदेश. इस तरह के धर्म कर्म, दर्शन के प्रसंगों से गँगा-रामगँगा पंचनद कटरी में श्रद्धा भक्ति के आध्यात्मिक संगम हिलोरें ले रहा है. हरपालपुर के गाँव अंतूपूरवा खद्दीपुरराजा स्थित दुर्गा देवी मंदिर पर चल रहे त्रिसत्रीय धार्मिक अनुष्ठान में नैमिषधाम के यज्ञाचार्य निर्दोष अग्निहोत्री ने शतचण्डी महायज्ञ में यजमान संतोष त्रिवेदी, जितेंद्र अग्निहोत्री, श्यामाकुमार त्रिवेदी, महेश अग्निहोत्री, गँगाकिशोर ने अरणीमंथन कराकर यज्ञवेदी में अग्नि प्रज्ज्वलित की. यज्ञाचार्य ने यज्ञयम को परमार्थकारी बताया. परीक्षित राममोहन अग्निहोत्री वानप्रस्थी ने व्यासपीठ का पूजन किया. त्रिसत्रीय अनुष्ठान के प्रत्येक सत्र में आरती-पूजन और प्रसाद वितरण हुआ#

#श्रीरामकथा व्यास शिवशरण अग्निहोत्री ने राम-सीता विवाह का संगीतमय वर्णन किया. आचार्य प्रवर ने संस्कारों में लोकरीतियों, लोकगीतों की उपयोगिता और गृहस्थ जीवन के लोकमंगल स्वरूप पर प्रकाश डाला. श्रीराम के राजतिलक की तैयारियों के बीच कैकेई वरदान और राम वनगमन के मार्मिक प्रसंगों से धार्मिक माहौल में श्रोताओं की भावनाएँ छलक उठीं. आचार्य प्रवर ने जीवन के यथार्थ को समझाते हुए कहा तप-त्याग में ढलकर ही व्यक्तित्व कुंदन की तरह दमकता है. कथाव्यास शिवशरण अग्निहोत्री बोले कि राजा दशरथ द्वारा श्रीराम के राजतिलक के निर्णय के बीच कैकेई को उनके वनगमन का वरदान देने पर दोनों सम-विषम स्थितियों में भगवान राम विचलित नहीं हुए. कहा परिवारों के विघटन और विवादों को बचाने के लिए भगवान श्रीराम के धैर्य से समाज सीख ले. आचार प्रवर ने कहा भगवान श्रीराम का जीवन लोकमंगल के लिए प्रेरणादायी है#

#श्रीमद्भागवतकथा में कथाव्यास शिवम अग्निहोत्री ने धर्म-संस्कृति के साथ गीता-महाभारत के प्रसंगों को उभारा. महाबली भीम और दुर्योधन के गदा युद्ध में धर्म की व्याख्या की. कहा दुर्योधन द्वारा युद्ध के नियम-धर्म की बात पर योगीराज श्रीकृष्ण ने द्यूतक्रीडा के छल, लाक्षागृह के प्रपंच, द्रोपदी के चीरहरण की निर्लज्जता, चक्रव्यूह में अभिमन्यु वध के कपट को अधार्मिक बताया. कहा छल, कपट के अधर्म का सहारा लेने वालों द्वारा विपत्तिकाल में धर्म की दुहाई देना अनुचित है. धर्म अधर्म की परिभाषा के बीच भीम ने गदा युद्ध में दुर्योधन की जंघाएँ तोडकर उसका प्राणान्त किया और चहुँओर गूंजा यतो धर्म: ततो जय#

#अनुष्ठान में श्यामसुन्दर अग्निहोत्री, अनिल तिवारी, सुभाष तिवारी, बीडीसी रोहित अग्निहोत्री, प्रधान विष्णू, राकेश अग्निहोत्री, मोहित अग्निहोत्री, ब्रजेश अग्निहोत्री, रामलखन मिश्र, प्रेमबाबू तिवारी, कामेश, दयाराम मिश्र, रामबाबू दुबे, सर्वेश राजपूत, चंद्रपाल कश्यप, प्रेम, रामसागर आदि श्रद्धालु महिलाएँ, बच्चे उपस्थित रहे#

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