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#हरदोई:- 45 डिग्री की गर्मी में डिजिटल जनगणना के संघर्ष से जूझते शिक्षक#


#हरदोई:- 45 डिग्री की गर्मी में डिजिटल जनगणना के संघर्ष से जूझते शिक्षक#

#भीषण गर्मी और तकनीकी दिक्कतों के बीच जनगणना अभियान जारी, प्रगणकों ने बयां किया दर्द#

#हरदोई: उत्तर प्रदेश में चल रहे डिजिटल जनगणना अभियान के बीच भीषण गर्मी और तकनीकी चुनौतियों के बावजूद बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षक पूरी निष्ठा से राष्ट्रीय दायित्व निभा रहे हैं। 22 से 25 मई तक 45 से 50 डिग्री तापमान और लू के थपेड़ों के बीच प्रगणक गांव-गांव जाकर डिजिटल डेटा संग्रह करने में जुटे रहे#

#जनपद हरदोई के टड़ियावां ब्लॉक अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय कोटरा में कार्यरत सहायक अध्यापक एवं प्रगणक विनोद शिरोमणि ने फील्ड के अनुभव साझा करते हुए द टेलीकास्ट को बताया कि एक-एक प्रगणक को 120 से 150 घरों का सर्वे लक्ष्य दिया गया है, जहां प्रत्येक परिवार से मकान, सुविधाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़े 33 सवालों का डेटा डिजिटल ऐप में दर्ज करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि तेज धूप में घरों के बाहर खड़े होकर डेटा फीड करने में 20 से 25 मिनट तक लग जाते हैं#

#प्रगणकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ग्रामीणों में व्याप्त वह डर है, जिसमें लोग यह मान बैठे हैं कि सही जानकारी देने पर राशन कार्ड कट सकता है। इसी वजह से कई लोग मकान और सुविधाओं की जानकारी छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ लोग बाइक और स्मार्टफोन होने के बावजूद उसे दहेज या रिश्तेदारों का सामान बताकर जानकारी से बचते नजर आए। वहीं “हर घर जल” योजना की टोंटी गायब होने और ससुराल से जुड़े मजेदार बहानों ने भी प्रगणकों को असमंजस में डाल दिया#

#विनोद शिरोमणि ने बताया कि भीषण गर्मी के कारण मोबाइल फोन अत्यधिक गरम होकर हैंग हो रहे हैं। लिथियम-आयन बैटरियों में तकनीकी दिक्कत और बैटरी फटने का भी खतरा बना रहता है। इसके अलावा ऐप में सुधार की आवश्यकता बताते हुए उन्होंने कहा कि डेटा सिंक होने के बाद “डिलीट” विकल्प की जरूरत नहीं है, जबकि भवन एवं क्रम संख्या सुधारने के लिए “सेंड बैक” और “रिजेक्ट” जैसे विकल्प होने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि फील्ड में उतारने से पहले प्रगणकों को लाइव अभ्यास प्रशिक्षण दिया जाए, जिससे तकनीकी त्रुटियां कम हो सकें#

#इन तमाम चुनौतियों के बावजूद शिक्षक पूरी जिम्मेदारी के साथ डिजिटल जनगणना अभियान को सफल बनाने में जुटे हुए हैं। प्रगणकों का कहना है कि यदि तकनीकी स्तर पर कुछ सुधार किए जाएं तो राष्ट्रीय महत्व का यह डेटा और अधिक सटीक एवं त्रुटिहीन तैयार हो सकेगा#

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