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#सीतापुर:- नैमिषारण्य- नारदानंद आश्रम में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव: श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन धूमधाम से मना, 'नंद के आनंद भयो' जयकारों से गूंज उठा परिसर#


#सीतापुर:- नैमिषारण्य- नारदानंद आश्रम में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव: श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन धूमधाम से मना, 'नंद के आनंद भयो' जयकारों से गूंज उठा परिसर#

#सीतापुर: नैमिषारण्य- के नारदानंद आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर पूरा पंडाल 'नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की' के जयकारों से गूंज उठा। कुशीनगर जनपद से पधारी प्रसिद्ध बाल कथा व्यास अनुष्का पाठक ने श्रीकृष्ण के दिव्य जन्म प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने शुकदेव-परीक्षित संवाद को आगे बढ़ाते हुए वामन अवतार, राम जन्म और कृष्ण अवतार की कथाएं सुनाईं। श्रीब्यास ने बताया कि जब पृथ्वी पर अधर्म, अत्याचार और पाप बढ़ता है, तब भक्तों की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए भगवान स्वयं अवतार लेते हैं। भगवान विष्णु ने कंस के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए देवकी और वसुदेव के आठवें पुत्र के रूप में कारागार में जन्म लिया। कथा व्यास ने इसका आध्यात्मिक रहस्य समझाते हुए कहा कि कंस अहंकार का प्रतीक है, जबकि वासुदेव और देवकी जीव व बुद्धि के प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि जब जीव और बुद्धि भगवान की शरण में आते हैं, तो अज्ञान के सारे बंधन स्वतः ही टूट जाते हैं। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की सजीव झांकी भी सजाई गई। इसमें वासुदेव जी को बाल स्वरूप कान्हा को टोकरी में रखकर यमुना पार कर गोकुल ले जाते हुए दर्शाया गया। जन्मोत्सव के अवसर पर माखन-मिश्री का विशेष भोग लगाया गया। इसके साथ ही खिलौने और मिठाइयां भी भक्तों में वितरित की गईं। इस दौरान भजनों पर महिला, पुरुष और बच्चों सहित सभी श्रद्धालु देर तक थिरकते रहे। मुख्य यजमान आलोक अस्थाना, परीक्षित महेंद्र प्रताप सिंह उर्फ रानू एवं मोना सिंह ने भागवत पोथी, वेदी और आचार्य का विधि-विधान से पूजन-आरती की। शांति कुटी आश्रम के महंत स्वामी शास्वतानंद जी महाराज भी मंच पर मौजूद रहे। आयोजक राम स्वरूप दास ने सभी भक्तों का आभार व्यक्त करते हुए आगामी दिनों की कथा में भी उपस्थित रहने की अपील की। इस अवसर पर क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्ति और भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे#

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