इटावा:- लखना रेंज के प्रयासों से वेस्टलेंड बन गया वेटलैंड, राज्यपक्षी सारस ने बनाया अपना घोंसला दिये अंडे...
इटावा:- लखना रेंज के प्रयासों से वेस्टलेंड बन गया वेटलैंड, राज्यपक्षी सारस ने बनाया अपना घोंसला दिये अंडे...
इटावा:- लखना रेंज के प्रयासों से वेस्टलेंड बन गया वेटलैंड, राज्यपक्षी सारस ने बनाया अपना घोंसला दिये अंडे...
इटावा:- लखना रेंज के प्रयासों से वेस्टलेंड बन गया वेटलैंड, राज्यपक्षी सारस ने बनाया अपना घोंसला दिये अंडे...
इटावा:- एक दूसरे के लिये जीवन भर समर्पित ,प्रेम का प्रतीक, सौभाग्य की प्रतिमूर्ति व आज के बिखरते टूटते परिवारों की संस्कृति में अपने कर्तव्यों व परिवार की जिम्मेदारियों का निर्वहन कर समाज को जीवंत प्रेम का एक संदेश देता हुआ व अपने सम्बंध को जीवन के अंतिम समय तक निभाने वाला ईश्वर की बनाई रचना उत्तर प्रदेश का गौरव बना हमारा राज्य पक्षी सारस क्रेन (ग्रस एन्टीगोन एन्टीगोन) एक नॉन माइग्रेटरी प्रजाति है। जो उत्तर प्रदेश के जनपद इटावा व मैनपुरी क्षेत्र में अच्छी खासी संख्या मे देखी जाती है । विशाल पक्षियों की सबसे बड़ी उड़ने वाली प्रजातियो सारस सर्वाहारी है व छोटे क्रशटेशियन्स, एनिलिडस ,कीड़े मकोड़े,घोंघे,मेढ़क खाने वाला व प्रकृति में कीड़े मकोड़ो पर नियंत्रण करने वाला यह पक्षी लगभग 1.8 मीटर तक ऊँचा होती है जो कि,अक्सर खुले नमभूमि क्षेत्रो सहित धान के खेतों में अपना भोजन ढूंढता दिखाई देता है। *सिलेटी रंग का लम्बी सफेद मिक्स गर्दन व लाल व सिलेटी सिर व काली सिलेटी चोंच वाला ग्रुईडेई फ़ैमिली का सदस्य* अपने मेटिंग काल मे अपनी लम्बी गर्दन के स्ट्रनिंग रीजन से एक तेज ट्रमपेटिंग कॉल निकाल कर एक दूसरे के सामने नृत्य कर एक दूसरे से प्रणय निवेदन करते है व एक दूसरे के चारों ओर भी घूमते है। जोड़े बनाने व मेटिंग के बाद मानसून सत्र में जून से सितम्बर के मध्य इनका मुख्य ब्रीडिंग सीजन होता है... तब ही ये अंडे देते है और तभी ये *एक बड़ा घोंसला ज्यादातर धान के खेतों के निकट कीचड़ व उथले पानी युक्त नम भूमि में बना लेते है जो पानी मे एक छोटे से द्वीप (लैगून) जैसा दिखता है। इनके घोसले का आकार लगभग 2 मीटर चौड़ा व पानी से लगभग 1 मीटर तक ऊँचा हो सकता है। सामान्यतयः इनके घोंसले में एक या दो ही अंडे होते है... मुख्यतयः मादा द्वारा अंडों को व कभी कभी दौनो नर मादा द्वारा बारी बारी से अंडों को सेते हुये देखा गया है। अंडों के इन्क्यूबेशन (सेने) का समय एक माह या उससे (30 से 34 दिन) भी हो सकता है... उसके बाद ही अंडों से बच्चे बाहर आते है। इनका जीवन काल 40 से 45 वर्ष तक वजन 4 से 7 किलो तक व इनके पंखों का आकार 250 इंच तक होता है। नर सारस आकार में मादा से कुछ बड़ा होता है। *इनके अंडों को शिकारी कुत्तों व कौवों ब्राह्मी काईट से विशेष रूप से खतरा होता है...
अक्सर जागरूकता की कमी से इनके घटते प्राकृतिक वास सहित भोजन की कमी व रासायनिक केमिकल के प्रयोगों से, बिजली के तारो में उलझकर मरने, वेटलैंड्स में गर्मियों में पानी की कमी व कभी अवैध शिकार से भी इनकी जनसंख्या कभी कभी प्रभावित होती रहती है...
सारसों के संरक्षण पर शोध कार्य से जुड़े संस्था ओशन के महासचिव, पर्यावरणविद एवं वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ आशीष त्रिपाठी के अनुसार- सारस क्रेन की प्रजाति विश्व भर में वन्यजीवों की लाखों प्रजातियों का वैश्विक डाटा रखने वाली संस्था आईयूसीएन के द्वारा जारी रेड डेटा बुक में भी शामिल है। व एक संरक्षित पक्षी भी है , इसके शिकार पर या इसे किसी भी तरह से सताये जाने पर वन्यजीव अधिनियम 1972 के तहत पूर्णतयः प्रतिबन्ध लगाया गया है साथ ही किसी भी प्रकार से इसे नुकसान पहुंचाने पर दोषी पाये जाने के जुर्म में कड़ी सजा व जुर्माने का भी प्रावधान है...
प्रभागीय निदेशक,वन विभाग इटावा राजेश सिंह वर्मा* ने इस घटना के बारे में जानकारी देते हुये बताया कि, मैंने स्वयं जाकर वह जगह देखी है *साधारणतयः इंसानों से हमेशा दूर ही रहने वाले सारस पक्षी के जोड़े द्वारा जनपद के किसी मुख्य मार्ग के निकट ही किसी शहरी क्षेत्र में घोंसला बनाये जाने की सूचना इससे पहले हमें कभी नही मिली है। जो एक शोध का विषय भी है । लखना रेंज के प्रयासों से वन विभाग को जो यह शुभ समाचार मिला है उसके लिये में समस्त रेंज स्टाफ को बधाई देता हूँ साथ ही आस पास के क्षेत्र की जनता से भी मेरी यही अपील है कि,उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा घोषित हमारा ये राज्य पक्षी सारस हम सबकी एक अमूल्य धरोहर भी है अतः अपने राज्य पक्षी के संरक्षण में पूरा सहयोग करें व प्रकृति का भरपूर आनंद लें...
क्षेत्रीय वन अधिकारी लखना रेंज विवेकानंद दुबे* ने इस विषय पर जानकारी देते हुये बताया कि,यह *मेरे अब तक के कार्यकाल की एक असाधारण घटना भी है क्यों कि अमूमन सारस पक्षी शहर के शोर शराबे से दूर ही हमेशा अपने घोंसले बनाते चले आये है । चूंकि,आबादी क्षेत्र होते हुये भी इस जोड़े ने बकेवर लखना के शहरी क्षेत्र के मुख्य व्यस्त मार्ग से मात्र 15 से 20 मीटर दूरी पर ही अपना घोंसला बनाया है । यह बात बड़ा ही उत्साहित करती है। आपको बता दें कि, इससे पहले यह जगह बिल्कुल ही बेकार ही पड़ी थी जिसपर अक्सर बड़ी संख्या में प्रसिद्ध लखना मन्दिर में दर्शन करने आने वाले लोग अपने अपने निजी वाहन यहाँ खड़े कर देते थे व कुछ लोग मरे हुये जानवर भी यहाँ फेंक जाते थे। जिससे संक्रमण फैलने का खतरा रहता था। लेकिन अब जब बरसात के बाद से यहॉं सारस पक्षी के इस सुंदर जोड़े ने यहॉं की वन विभाग इटावा से सम्बद्ध स्थापित नर्सरी की हरियाली के साथ भरपूर भोजन की उपलब्धता व यहाँ के हरे भरे वातावरण को देखकर व उससे प्रभावित होकर अपना घोंसला बनाया है। सारस पक्षी द्वारा हरियाली सम्बर्धन से आकर्षित होकर अपना नेचुरल हैबिटेट छोड़कर किसी आबादी क्षेत्र में आकर घोंसला बनाना एक पहली ऐतिहासिक घटना है इस उपलब्धि से हम सभी स्टाफकर्मी भी बेहद ही उत्साहित है। इस जोड़े व अंडों की सुरक्षा के भी सारे इंतज़ाम किये जा रहे है...
रिपोर्टर: इटावा- से- डा. आशीष त्रिपाठी खोज जारी है.24×7 न्यूज़ चैनल की खास रिपोर्ट...
इटावा:- लखना रेंज के प्रयासों से वेस्टलेंड बन गया वेटलैंड, राज्यपक्षी सारस ने बनाया अपना घोंसला दिये अंडे...
अक्सर जागरूकता की कमी से इनके घटते प्राकृतिक वास सहित भोजन की कमी व रासायनिक केमिकल के प्रयोगों से, बिजली के तारो में उलझकर मरने, वेटलैंड्स में गर्मियों में पानी की कमी व कभी अवैध शिकार से भी इनकी जनसंख्या कभी कभी प्रभावित होती रहती है...
सारसों के संरक्षण पर शोध कार्य से जुड़े संस्था ओशन के महासचिव, पर्यावरणविद एवं वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ आशीष त्रिपाठी के अनुसार- सारस क्रेन की प्रजाति विश्व भर में वन्यजीवों की लाखों प्रजातियों का वैश्विक डाटा रखने वाली संस्था आईयूसीएन के द्वारा जारी रेड डेटा बुक में भी शामिल है। व एक संरक्षित पक्षी भी है , इसके शिकार पर या इसे किसी भी तरह से सताये जाने पर वन्यजीव अधिनियम 1972 के तहत पूर्णतयः प्रतिबन्ध लगाया गया है साथ ही किसी भी प्रकार से इसे नुकसान पहुंचाने पर दोषी पाये जाने के जुर्म में कड़ी सजा व जुर्माने का भी प्रावधान है...
प्रभागीय निदेशक,वन विभाग इटावा राजेश सिंह वर्मा* ने इस घटना के बारे में जानकारी देते हुये बताया कि, मैंने स्वयं जाकर वह जगह देखी है *साधारणतयः इंसानों से हमेशा दूर ही रहने वाले सारस पक्षी के जोड़े द्वारा जनपद के किसी मुख्य मार्ग के निकट ही किसी शहरी क्षेत्र में घोंसला बनाये जाने की सूचना इससे पहले हमें कभी नही मिली है। जो एक शोध का विषय भी है । लखना रेंज के प्रयासों से वन विभाग को जो यह शुभ समाचार मिला है उसके लिये में समस्त रेंज स्टाफ को बधाई देता हूँ साथ ही आस पास के क्षेत्र की जनता से भी मेरी यही अपील है कि,उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा घोषित हमारा ये राज्य पक्षी सारस हम सबकी एक अमूल्य धरोहर भी है अतः अपने राज्य पक्षी के संरक्षण में पूरा सहयोग करें व प्रकृति का भरपूर आनंद लें...
क्षेत्रीय वन अधिकारी लखना रेंज विवेकानंद दुबे* ने इस विषय पर जानकारी देते हुये बताया कि,यह *मेरे अब तक के कार्यकाल की एक असाधारण घटना भी है क्यों कि अमूमन सारस पक्षी शहर के शोर शराबे से दूर ही हमेशा अपने घोंसले बनाते चले आये है । चूंकि,आबादी क्षेत्र होते हुये भी इस जोड़े ने बकेवर लखना के शहरी क्षेत्र के मुख्य व्यस्त मार्ग से मात्र 15 से 20 मीटर दूरी पर ही अपना घोंसला बनाया है । यह बात बड़ा ही उत्साहित करती है। आपको बता दें कि, इससे पहले यह जगह बिल्कुल ही बेकार ही पड़ी थी जिसपर अक्सर बड़ी संख्या में प्रसिद्ध लखना मन्दिर में दर्शन करने आने वाले लोग अपने अपने निजी वाहन यहाँ खड़े कर देते थे व कुछ लोग मरे हुये जानवर भी यहाँ फेंक जाते थे। जिससे संक्रमण फैलने का खतरा रहता था। लेकिन अब जब बरसात के बाद से यहॉं सारस पक्षी के इस सुंदर जोड़े ने यहॉं की वन विभाग इटावा से सम्बद्ध स्थापित नर्सरी की हरियाली के साथ भरपूर भोजन की उपलब्धता व यहाँ के हरे भरे वातावरण को देखकर व उससे प्रभावित होकर अपना घोंसला बनाया है। सारस पक्षी द्वारा हरियाली सम्बर्धन से आकर्षित होकर अपना नेचुरल हैबिटेट छोड़कर किसी आबादी क्षेत्र में आकर घोंसला बनाना एक पहली ऐतिहासिक घटना है इस उपलब्धि से हम सभी स्टाफकर्मी भी बेहद ही उत्साहित है। इस जोड़े व अंडों की सुरक्षा के भी सारे इंतज़ाम किये जा रहे है...
रिपोर्टर: इटावा- से- डा. आशीष त्रिपाठी खोज जारी है.24×7 न्यूज़ चैनल की खास रिपोर्ट...




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