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#हरदोई:- शाहबाद- विवेचक ने पहले पीड़ित के लाखों कराए खर्च,पीड़ित की किशोरी मिलने पर भगाया#


#हरदोई:- शाहबाद- विवेचक ने पहले पीड़ित के लाखों कराए खर्च,पीड़ित की किशोरी मिलने पर भगाया#

#खुलेआम मानवाधिकार सहित कानून की उड़ाई गई धज्जियां,पीड़ित ने विवेचक पर जालसाजी का आरोप लगाकर मुख्यमंत्री से न्याय की लगाई गुहार#

हरदोई: शाहाबाद- कहा जाता है कि अपराधी कितना भी बड़ा हो पुलिस से बच नही पाता लेकिन जब पुलिस ही अपराधी के साथ हो तो बड़े से बड़ा अपराध खत्म होने में देर नही लगती। विवेचक दुष्कर्म जैसे संगीन अपराधों में भी कानून का बलात्कार करने से नही चूकते#

#ऐसा ही एक मामला कोतवाली क्षेत्र के एक गांव का है जहां से एक युवक 16-17 वर्षीय किशोरी को अपने एक साथी के साथ मिलकर 29 सितंम्बर को भगा ले गया था। जिसकी रिपोर्ट किशोरी के पिता द्वारा कोतवाली में नामजद दर्ज कराई गई थी। उक्त प्रकरण की जांच कर रहे एसआई रामलाल सोनकर द्वारा गोरखपुर, संतकबीरनगर, कमालगंज, अगामपुर तथा हरियाणा के फरीदाबाद में दविश देकर आरोपी को 26 अक्टूबर को फरीदाबाद की एक अदालत के बाहर से धर दबोचा और कोतवाली शाहाबाद ले आये। किशोरी के नाबालिक होने के कारण फरीदाबाद कोर्ट ने किशोरी को नारी निकेतन भेज दिया था। आरोपी के विरुद्ध स्थानीय कोतवाली में धारा 363,366 के तहत एफआईआर होने के कारण पुलिस ने मानवाधिकार आयोग की धज्जियां उड़ाते हुए आरोपी को 16 दिनों तक हिरासत में रखा। किशोरी के पिता का आरोप है कि एसआई ने आरोपी के परिजनों से सांठगांठ कर 10 नबम्बर को उसकी पुत्री को फ़रीदाबाद नारी निकेतन से लाकर 12 नबम्बर को सीजेएम कोर्ट में पेश कर 164 के तहत बयान कराकर आरोपी के साथ कहीं भेज दिया। पिता का आरोप है कि इस दौरान उसे व उसके परिजनों को भी उसकी पुत्री से नही मिलने दिया तथा हरदोई कोर्ट में बयान वाले दिन भी एसआई रामलाल सोनकर ने उसे न ही कुछ बताया,पूंछने पर गालीगलौज करके भगा दिया एवं उसके पुत्र को कोतवाली में बन्द कर दिया,ताकि पीडित उसी में उलझा रहे व आरोपी से सांठगांठ करके उसकी पुत्री को उसी के साथ भेज दिया जाए। बहीं उसके पुत्र को छोड़ने के एवज में 30 हजार रुपये भी ले लिए गए। जबकि आरोपी और उसके घर वाले उसकी पुत्री से लगातार मिलते रहे। जिससे वह और उसका परिवार पुलिस की कार्य शैली से आहत व परेशान होकर मुख्यमंत्री सहित आला अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है#

#एक ही मुकदमें में अलग-अलग कानून आखिर कैसे#

शाहाबाद। इसे कहें तो कानून का बलात्कार भी कम होगा,पीड़ित पिता के साथ चार बार फरीदाबाद कोर्ट में लड़की सुपुर्दगी लेने के लिए कोर्ट में किशोरी को नाबालिग होने के प्रमाण पेश किए बहीं जब सुपुर्दगी मिल गई तो किशोरी के पिता का आरोप है कि हरदोई कोर्ट में बयान बाले दिन उसके ही पुत्र को थाने में बन्द कर दिया, उसकी पुत्री से विवेचक ने मिलने तक नही दिया और आरोपी से मिलीभगत करके हरदोई कोर्ट में 164 के बयान आरोपी के पक्ष कराते हुए कोर्ट को गुमराह कर बालिग दिखाते हुए उसी आरोपी के साथ भेज दिया। आरोप है कि इस एवज में आरोपी से एक मोटी रकम विवेचक रामलाल सोनकर ने बसूल करते हुए कानून का ही बलात्कार कर दिया। बहीं पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस किशोरी को फरीदाबाद कोर्ट में विवेचक ने नाबालिग दिखाया उसी को हरदोई कोर्ट में बालिग कैसे एवं विवेचक ने इतने संगीन अपराध में भी पीड़िता का मेडिकल करना क्यों उचित नही समझा?

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