#हरदोई:- शीर्षक: अधिवक्ता- जीवन/ लेखक वरिष्ठ अधिवक्ता जितेन्द्र श्रीवास्तव#
#हरदोई:- शीर्षक: अधिवक्ता- जीवन/ लेखक वरिष्ठ अधिवक्ता जितेन्द्र श्रीवास्तव#
#कचहरी की उधेडो बुन में सुबह - शाम होती है,
वकीलों का ना कोई दिन, ना कोई रात होती है।
तमन्ना खुद की हर जो मारकर रोशन जहां करते,
अंधेरे से भरे तल के ये दीपक जान पडते हैं#
#1- नहीं मौसम की कोई मार कभी पेशे को पडती है,
बढे तेवर सूरज के भी, कभी ना इनको चुभती है।
पहनकर कोट काला जब वकील साहब निकलते हैं,
जरा कभी गौर करना तुम, फरिश्ते से वो लगते हैं#
#कचहरी की उधेडो बुन में.....
#2- अधिकारों की मांगों की वो जायज मांग करते हैं,
मुवक्किल पर बीती हर बात को अपना बताते हैं,
वकील ही है पीड़ित खुद ही दलीलें जान पडती है,
दरअसल दर्द में उसके वो इतना रम जो जाते#
#कचहरी की उधेडो बुन में......
#3- ये कहना है गलत साहेब वकील बेफालतू लडते,
ये कहना है सही साहेब किसी से ये नहीं डरते।
किसी बेबस की मजबूरी को भी बेहतर समझते हैं,
छोडते फीस तो है ही भाडा ऊपर से देते हैं#
#कचहरी की उधेडो बुन में......
#4-यहां संसार में परेशानी का अंबार क्या कम है,
पराई मुश्किलों को फिर भी अपनाने का जो दम है।
यही पेशा सिखाता है, नहीं पीड़ा पराई है,
लगे हो घाव खुद के ही, तभी नहीं दर्द होता है#
#कचहरी की उधेडो बुन में.....
#5-ये काला कोट पेशी पर विधि दर्शन कराता है,
विधि के ज्ञान की महत्ता के दर्पण को बताता है।
जुबां कानून की चढकर भले कडवी लगी होगी,
मगर इंसाफ़ की सीढ़ी तो काला कोट चढाता है#
#कचहरी की उधेडो बुन में सुबह - शाम होती है,
वकीलों का ना कोई दिन, ना कोई रात होती है।
तमन्ना खुद की हर जो मानकर रोशन जहां करते,
अंधेरे से भरे तल के ये दीपक जान पडते हैं/
#लेखक वरिष्ठ अधिवक्ता जितेन्द्र श्रीवास्तव जी/ साथ में वरिष्ठ अधिवक्ता पी. पी मिश्रा जी, अधिवक्ता प्रदीप सिंह यादव जी, अधिवक्ता संजीव अवस्थी जी, अधिवक्ता शेखर त्रिपाठी जी, डीपी सिंह चौहान "सम्पादक" खोज जारी है.24×7 न्यूज चैनल/ हिन्दी दैनिक समाचार पत्र#
"सम्पादक" डीपी सिंह चौहान- खोज जारी है.24×7 न्यूज चैनल/ हिन्दी दैनिक समाचार पत्र की खास रिपोर्ट...

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