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#हरदोई:- बिलग्राम- ऐतिहासिक धरोहर सहजन कुआं पर हो रहा अवैध निर्माण जिम्मेदार मौन#


#हरदोई:- बिलग्राम- ऐतिहासिक धरोहर सहजन कुआं पर हो रहा अवैध निर्माण जिम्मेदार मौन#

#हरदोई:- बिलग्राम- नगर की ऐतिहासिक धरोहरों में से एक सहजन कुआं अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर है क्योंकि इस की देखभाल करने वाला अब शायद कोई नहीं है नगर पालिका बिलग्राम मूकदर्शक बनकर शिकायत का इंतजार कर रही है।इस सहजन कुंआ की ओर न ही शासन ध्यान दे रहा और न प्रशासन शायद इसीलिये आसपास के रहने वाले लोगों ने इसपर दीवार आदि उठाकर कब्जा करना शुरू कर दिया है जिससे कस्बे के प्रसिद्ध सहजन कुएं के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है।इस ऐतिहासिक और प्राचीनतम कुएं का वर्णन भारतीय इतिहास से संबंधित कई किताबों में मिलता है अकबर के दरबारी अबुल फजल द्वारा लिखी गई आईने अकबरी में कुऐं से निकलने वाले चमत्कारी पानी के बारे में लिखा है कि इस कुएं का पानी जो व्यक्ति 40 दिन पी ले तो उसकी आवाज़ सुरीली हो जाती है।बिलग्राम के मोहल्ला सहजन जो अब कासूपेट मोहल्ले में आता है ये कुआं अभी भी मौजूद है जो देखरेख के अभाव में अपनी पहचान खोता जा रहा है इसी सहजन कुंआ पर पड़ोस के ही कुछ लोग अवैध निर्माण इसी कुंआ पर करने में जुटे है लेकिन कस्बे की ट्रिपल इंजन सरकार का इस ओर कोई ध्यान नही हैं केवल ट्रिपल इंजन सरकार इस समय वाहवाही लूटने मे लगी हैं। सूत्र बताते है की पालिका के जिम्मेदार लोगों को सहजन कुंआ पर हो रहे अवैध निर्माण/अतिक्रमण की जानकारी है लेकिन किसी जिम्मेदार अधिकारी/कर्मचारी के द्वारा अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है।क्या नगर पालिका स्वत: संज्ञान लेकर कोई भी कार्यवाही नहीं कर सकती.?? अब देखने वाली बात यह होगी कि खबर चलने के बाद बिलग्राम नगर पालिका के नवनिर्वाचित अध्यक्ष और अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका की ऐतिहासिक धरोहर सहजन कुंआ पर हुए अवैध निर्माण/अतिक्रमणकर्ताओ पर कोई कार्यवाही करवाएंगे या यूं ही पूर्व की भांति बिलग्राम कस्बे की ऐतिहासिक धरोहर सहजन कुंआ को मिट्टी में मिलता देखना चाहेंगे।सहजन कुआं को लेकर अनेक लेखकों ने उसकी प्रशंसा करते हुए कई काव्य लिखें हैं इस संबंध में डॉक्टर शैलेश जैदी अपनी पुस्तक बिलग्राम के मुसलमान हिंदी कवि में लिखते हैं की मधनायक ने खुद अपने काव्य के माध्यम से उन्होंने इस कुएं की प्रशंसा की है मदनायक ने सिंगार में प्रष्ठ संख्या 45 पर लिखते हैं#


#इनसेट- अति पवित्र जल गंग सम मानसरोवर रूप#

#तारिथ है खट दरस को कूप तडांग अनूप#

#अच्छर करवारी कलित लोज तान गुंन चेत#

#रंग रतक मुद्रा मपत ताल झोंक जल लेट#

#ऐसे ही कई काव्य श्रंगार में लिखे हैं सहजन कुआं को लेकर बिलग्राम में कई किस्से प्रसिद्ध हैं कहा जाता है कि तानसेन के कानों में जब मदनायक की सुरीली आवाज पहुंची तो वो इस कदर प्रभावित हुआ कि ग्वालियर से पैदल चलकर बिलग्राम कस्बे में पहुंचा और सहजन कुआं के करीब दम लेने के लिए बैठ गया कुए पर उस वक्त कई पुरुष और महिलाएं पानी भर रही थी उसमें से एक औरत अपने घड़े को कुएं में पानी भरने के लिए छोड़ा घड़े के पानी में डूबते ही बुदुक बुदुक की आवाज निकलने लगी पानी भर रही औरत को यह आवाज नागवार गुजरी कहा कि मुआ बेवक्त का राग अलापता है यह कह घढा तोड़ डालती है जब यह आवाज तानसेन के कानों में पडती है वह हैरान होकर दरयाफ्त करता है यह कौन है बताया गया कि मदनायक के घर की नौकरानी है यह सुनकर कर तानसेन को और हैरत होती है और सोचता है कि मौसिकी की इस कदर जानकर जब ये नौकरानी है तो मधनायक की योग्यता का क्या आलम होगा तानसेन ने निश्चय किया कि मधनायक से मिलने की आरजू दिल में लिए ही वापस जाना पड़ेगा और वह चला गया जब मधनायक को ये खबर मिलती है कि उनका मेहमान उनसे बिना मिले ही चला गया तो परेशान होकर अपने अजीज से तानसेन को वापस बुलाकर मुलाकात कर मेहमान नवाजी करतें है#

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