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#हरदोई:- पिहानी- श्रीराम- भरत के प्रेम से प्रत्येक भाई को भाई से प्रेम का संदेश लेना चाहिए/ आचार्य#


#हरदोई:- पिहानी- श्रीराम- भरत के प्रेम से प्रत्येक भाई को भाई से प्रेम का संदेश लेना चाहिए/ आचार्य#

#हरदोई:- पिहानी- माँ इच्छापूर्णी रामजानकी मंदिर में चल रहे श्री राम विवाह महोत्सव में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुट रही है। कथा पाण्डाल में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए मानस मर्मज्ञ ने कहा, कि राम और भरत का प्रेम अनुकरणीय है, आज के मानवों को रामचरित मानस से शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए। व्यास पीठ पर विराजमान कथा वाचक प्रकाश चंद्र महाराज ने श्री राम-भरत मिलाप प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि राजा भरत ने चित्रकूट यात्रा के लिए सम्पूर्ण अयोध्यावासियों को तैयार कर लिया। राजतिलक की सामग्री को साथ लेकर गुरुदेव की अनुमति से भरत सभी को साथ लेकर भगवान की खोज में निकल पड़े उन्होंने कहा कि इस प्रसंग से यह सीख मिलती है कि जन्म जन्मांतर से भटके हुए जीव को तब तक परम शान्ति नहीं मिल सकती जब तक कि वह भगवान की खोज न करें। मार्ग की अनेक बाधाओं को पार करते हुए भरत चित्रकूट तक पहुंचे। सच्चे साधक के मार्ग में अनेक बाधाएं आती है किन्तु भगवत प्रेम के बल पर वह सम्पूर्ण बाधाओं को पार कर लेता है। चित्रकूट में भरत और श्री राम की प्रेममयी दशा को देखकर वहां के पत्थर भी पिघलने लगे। भगवान ने भरत के आग्रह को स्वीकार करते हुए चित्रकूट की सभा में उन्हीं को निर्णय करने के लिए कहा तो भरत ने भगवान को वापस अयोध्या लौटने के लिए प्रार्थना की तथा स्वयं पिता के वचन को मानकर वनवासी जीवन बिताने का संकल्प कर लिया किन्तु श्री राम को यह स्वीकार नहीं था। दोनों भाई एक दूसरे के लिए सम्पत्ति और सुखों का त्याग करने के लिए आतुर थे और विपत्ति को अपनाना चाहते थे। आज तो भाई भाई की सम्पत्ति को हड़पना चाहता है। यदि भाई भाई की विपत्ति को बांटने लगे तो संसार भर के परिवारों की समस्याओं का समाधान हो सकता है। श्रीराम- भरत के प्रेम से प्रत्येक भाई को भाई से प्रेम का संदेश लेना चाहिए#

#भरत ने भगवान की चरण पादुकाओं को सिंहासन आरूढ़ कर चौदह वर्ष तक दास बनकर उनके राज्य की सेवा करते रहे। यह भ्रातृत्व प्रेम की पराकाष्ठा है। भगवान श्रीराम जंगल में रहकर वनवासी-तपस्वी का जीवन जिये किन्तु भरत तो नंदीग्राम में रहकर भी सम्पूर्ण नियमों का पालन करते हुए एक तपस्वी की भांति रहे। जहां युद्ध न हो, वहीं अयोध्या है। भगवान की भक्ति, रति और त्याग का अद्भुत उदाहरण हैं श्री भरत जी महाराज। इस अवसर पर यजमान हरिशरण, श्यामाचरण, हरिपाल, बहादुर राठौर, रामचंद्र वैश्य, धर्मेंद्र सोनी, लल्लन रस्तोगी समेत भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे#

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