#हरदोई:- दीनबन्धु दीनानाथ, मेरी तन हेरिये# भाई नाहिं, बन्धु नाहिं, कटुम-परिवार नाहिं#
#हरदोई:- दीनबन्धु दीनानाथ, मेरी तन हेरिये#
#भाई नाहिं, बन्धु नाहिं, कटुम-परिवार नाहिं#
#ऐसा कोई मीत नाहिं, जाके ढिंग जाइये#
#खेती नाहिं, बारी नाहिं, बनिज ब्योपार नाहिं#
#ऐसो कोउ साहु नाहिं जासों कछू माँगिये#
#कहत मलूकदास छोड़ि दे पराई आस, राम धनि पायके अब काकी सरन जाई#
#संक्षिप्त में बाबा मलूकदास जी कहते हैं कि पराई (दूसरों की) आशा छोड़ दो। जब भगवान राम का धन (अर्थात उनकी भक्ति, उनका प्रेम) प्राप्त हो गया है, तो अब किसी और की शरण में जाने की आवश्यकता नहीं है#

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