#हरदोई:- समिति का मेडिकल स्टोर है तो दवाएं सस्ती मिलें: आशीष सिंह#
#हरदोई:- समिति का मेडिकल स्टोर है तो दवाएं सस्ती मिलें: आशीष सिंह#
#हरदोई: जिले में सरकारी, सोसाइटी व ट्रस्ट की सम्पत्तियों पर अवैध कब्जे को लेकर कांग्रेस के निवर्तमान अध्यक्ष आशीष सिंह ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाये हैं। उनका कहना है कि प्रशासन की मिलीभगत से हरदोई में माफिया निरंतर सरकारी व ट्रस्ट की जमीनों पर बेखौफ़ काबिज हो रहे हैं। ताज़ा मामला सिनेमा चौराहा स्थित हरदोई केंद्रीय उपभोक्ता सहकारी भण्डार लिमिटेड द्वारा संचालित एक मेडिकल स्टोर का है#
#श्री सिंह ने सवाल किया है ऐसा क्यों? अपना मेडिकल स्टोर खोलने के बजाए, निजी व्यापारी के मेडिकल स्टोर का समिति क्यों संचालन कर रही है? क्या समिति के उद्देशों के नियमानुसार आम जनमानस, केंद्र सरकार के कर्मचारी को दवाईयां भी असली और सरकारी मूल्य पर मिल रहीं हैं? इससे प्राप्त आय समिति के आधिकारिक खाते में जमा होती है#
#सवाल यह है जब समिति के संविधान में पहले से उसे अधिकार प्राप्त है आम जनमानस, केंद्रीय, सरकारी कर्मचारी को उचित दर पर दवाईयां उपलब्ध कराने के लिए तो समिति ने खुद का मेडिकल स्टोर क्यों संचालित नहीं किया? जबकि 1963 में केंद्रीय उपभोक्ता सहकारी भण्डार लिमिटेड की स्थापना ही इस उद्देश से की गई थी कि केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और आम जनता को उचित दरों पर आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध कराई जाएंगी और यह उपभोक्ता वस्तुओं, स्टेशनरी, दवाओं आदि की बिक्री करेगी, जो भारत सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के तहत काम करेगी#
#श्री सिंह का कहना है कि हरदोई केंद्रीय उपभोक्ता सहकारी भण्डार लिमिटेड द्वारा एक निजी व्यापारी का मेडिकल स्टोर संचालित किया जाना कहीं अपने उद्देश्यों से इतर निजी आय का श्रोत तो नहीं बन रही समिति। कहीं एक निज व्यापारिक हितों को साधने का साधन तो बन गई है। अब तो यह भी संदेह उत्पन्न हो रहा है कि इनकी दुकानें अभी भी समिति की संपत्ति हैं या दुकानें भी चंपत है। साथ ही ग्राहकों को जागरूक करते हुए ये भी कहा है कि निश्चित ही बाजार मूल्य से इस मेडिकल स्टोर पर इन्हीं व्यापारी के अन्य मेडिकल स्टोरों से सस्ती और असली दवाई आपको मिलनी चाहिए यदि ऐसा नहीं है तो समझ लीजिए कुछ तो गड़बड़ है। इससे पूर्व कांग्रेस नेता ने नघेटा रोड स्थित श्री श्यामले बिहारी ट्रस्ट की भूमि अवैध तरीके से बेंचे जाने पर शिकायते की थी#

No comments