#लखनऊ:- उत्तर प्रदेश- में अनुदेशकों को सुप्रीम राहत: नौकरी भी सुरक्षित, ₹17 हज़ार मानदेय पर लगी मुहर#
#लखनऊ:- उत्तर प्रदेश- में अनुदेशकों को सुप्रीम राहत: नौकरी भी सुरक्षित, ₹17 हज़ार मानदेय पर लगी मुहर#
#लखनऊ: उत्तर प्रदेश- में वर्षों से काम कर रहे करीब 25 हजार अंशकालिक शिक्षकों (अनुदेशकों) की नौकरी खत्म नहीं होगी। इनके 17 हजार रुपए के मानदेय का रास्ता भी साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की वह अपील खारिज कर दी है, जिसमें यूपी सरकार अनुदेशकों के मानदेय बढ़ाने के खिलाफ थी। सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने साफ कहा है कि संविदा की निर्धारित अवधि खत्म होने के बाद भी अनुदेशकों की नियुक्ति केवल संविदात्मक नहीं मानी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से करीब 2013 से मानदेय बढ़ोतरी की मांग कर रहे शिक्षकों को सीधी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा कि अंशकालिक शिक्षकों को निर्धारित संविदात्मक अवधि समाप्त होने के बाद भी काम पर बनाए रखा गया और उन्हें अन्यत्र नौकरी करने से भी रोका गया। ऐसे में यह नियुक्ति मात्र संविदात्मक नहीं रह जाती। कोर्ट ने माना कि इन परिस्थितियों में ऐसे पद स्वतः सृजित माने जाएंगे और सरकार उन्हें अस्थायी कहकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकती#
#राज्य सरकार की अपील खारिज, शिक्षकों की जीत#
#सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि अंशकालिक शिक्षकों के साथ वर्षों से अन्याय हुआ है। कोर्ट के इस फैसले को उत्तर प्रदेश के हजारों अनुदेशकों और अंशकालिक शिक्षकों की बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए 17,000 रुपए मानदेय का पूरा लाभ दिलाने के निर्णय को बरकरार रखा है#
#सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- मानदेय बढ़ाने में दिक्कत क्या है#
#अनुदेशकों के मानदेय से जुड़े इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को करीब तीन घंटे तक विस्तृत सुनवाई हुई। जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की डबल बेंच ने राज्य सरकार और याचिकाकर्ताओं को तीन दिन के भीतर लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट की टिप्पणियों से अनुदेशकों के पक्ष में माहौल बनता नजर आया। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से कड़े सवाल किए। कोर्ट ने कहा, “जब पढ़ेगा इंडिया, तभी तो बढ़ेगा इंडिया। आपको मानदेय देने में क्या दिक्कत है?” कोर्ट की इस टिप्पणी पर राज्य सरकार के वकील ने भी सहमति जताई, जिससे अनुदेशकों की उम्मीदें और मजबूत हो गईं#
#2013 से 7 हजार मानदेय, कोर्ट ने माना अनुचित श्रम व्यवहार#
#कोर्ट ने 2013 में तय किए गए ₹7,000 प्रतिमाह मानदेय को लेकर भी राज्य सरकार पर सख्त टिप्पणी की। डबल बेंच ने कहा कि इतने लंबे समय तक बिना किसी संशोधन के मानदेय तय रखना “अनुचित श्रम व्यवहार” की श्रेणी में आता है। अंशकालिक शिक्षक लगातार सेवाएं दे रहे हैं, ऐसे में उन्हें सम्मानजनक पारिश्रमिक से वंचित नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में कार्यरत अंशकालिक शिक्षक वर्ष 2013 में निर्धारित मानदेय के पुनरीक्षण के पूर्ण अधिकार के पात्र हैं। कोर्ट ने कहा कि मानदेय का पुनरीक्षण नियत अवधि पर किया जाना चाहिए, और यदि ऐसा संभव न हो तो कम-से-कम वार्षिक रूप से यह प्रक्रिया होनी चाहिए। आदेश में यह भी कहा गया कि 2017–18 से अंशकालिक शिक्षकों का मानदेय ₹17,000 प्रतिमाह माना जाएगा, जो अगले संशोधन तक प्रभावी रहेगा#
#1 अप्रैल 2026 से भुगतान, 6 महीने में बकाया चुकाने का आदेश#
#डबल बेंच ने आदेश दिया कि संशोधित मानदेय का भुगतान 1 अप्रैल 2026 से शुरू किया जाए। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि अंशकालिक शिक्षकों का पूरा बकाया आज यानी 4 फरवरी 2026 से छह महीने की अवधि के भीतर अनिवार्य रूप से भुगतान किया जाए#
#2017 में दोगुना हुआ था मानदेय, नहीं हुआ लागू#
#उत्तर प्रदेश: के बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत अनुदेशकों का मानदेय वर्ष 2017 में 8,470 रुपए से बढ़ाकर 17,000 रुपए किया गया था। हालांकि सत्ता परिवर्तन के बाद इस निर्णय को लागू नहीं किया गया। इसके विरोध में अनुदेशकों ने लखनऊ हाईकोर्ट की बेंच में याचिका दायर की थी। लखनऊ हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के तत्कालीन न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान ने अनुदेशकों को 17,000 रुपये मानदेय 9 प्रतिशत ब्याज सहित देने का आदेश दिया था। राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने केवल एक वर्ष के लिए 17,000 रुपये मानदेय भुगतान का निर्देश दिया, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 2 साल बाद सुप्रीम कोर्ट में पूरी हुई बहसकरीब 2 साल के अंतराल के बाद सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई पूरी हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता सखाराम यादव, पीएस पटवालिया और दुर्गा तिवारी ने अनुदेशकों की ओर से मजबूत पक्ष रखा। मुख्य याचिकाकर्ता आशुतोष शुक्ला, राकेश पटेल सहित अन्य याची भी सुनवाई के दौरान मौजूद रहे। अनुदेशकों के विधिक सलाहकार बृजेश त्रिपाठी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय अनुदेशकों के पक्ष में आना बड़ी जीत है#

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