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#नैमिषारण्य: 9वें पड़ाव नैमिषारण्य पहुंची 84 कोसी परिक्रमा, समीक्षा यात्रा से होगा सुधार#


#नैमिषारण्य: 9वें पड़ाव नैमिषारण्य पहुंची 84 कोसी परिक्रमा, समीक्षा यात्रा से होगा सुधार#

#नैमिषारण्य: 84 कोसी परिक्रमा अपने नौवें पड़ाव नैमिषारण्य में गुरुवार को पहुंच गई। नैमिष में परिक्रमा पहुंचते ही पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। हर तरफ परिक्रमार्थियों का ही रेला दिखाई दे रहा था। यहां के आश्रमों में भंडारे का आयोजन हुआ जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। बता दें कि महर्षि दधीचि द्वारा प्रारंभ की गई 84कोसी परिक्रमा जरिगवां से गुरुवार सुबह नौवें पड़ाव नैमिषारण्य पहुंच गई#

#रामादल के आगमन से नैमिषारण्य तीर्थ का माहौल भक्तिमय दिखाई दिया। तीर्थ में सुबह पांच बजे से जयकारों और भजन-कीर्तन के साथ परिक्रमार्थियों के आने का क्रम शुरू हो गया था। नैमिषारण्य आने के बाद परिक्रमार्थियों व साधु-संतों ने पड़ाव पर डेरा डालना शुरू कर दिया। डेरा जमाने के बाद श्रद्धालुओं ने बड़ी ही श्रद्धा से नैमिष तीर्थ स्थित आदि गंगा गोमती के घाटों और चक्रतीर्थ में स्नान किया। गोमती नदी में स्नान-पूजन के बाद परिक्रमार्थियों ने नैमिष तीर्थ स्थित मां ललिता देवी मंदिर, व्यास गद्दी, सूत गद्दी, नैमिष नाथ, हनुमान गढ़ी, देवदेवेश्वर, देवपुरी व कालीपीठ आदि धार्मिक स्थलों पर दर्शन-पूजन किया। प्रवास के दौरान पूरे नैमिष में बस राम-राम नाम का ही जयकारा गूंजता रहा। वहीं साधु-संत व परिक्रमार्थी डेरे में राम नाम संकीर्तन में लीन दिखे। नैमिष तीर्थ में परिक्रमा प्रवास के दौरान परिक्रमार्थियों के छोटे-छोटे तंबू काफी आकर्षक लग रहे थे#

#पूरे नैमिष में कई जगहों पर यात्रियों द्वारा खुद भोजन प्रसाद बनाने और तीर्थ में कई स्थानों पर भंडारों का भी दौर जारी रहा। जहां परिक्रमा पड़ाव पर अव्यवस्थाओं में कमी देख क्षुब्ध वनगढ़ आश्रम महंत संतोष दास खाकी ने कहा कि दोनों जनपदों के शासन प्रशासन को धन्यवाद है, लेकिन इस बार अभी हाल ही में हरदोई व सीतापुर के शासन प्रशासन के साथ एक समीक्षा बैठक के साथ समीक्षा यात्रा निकाली जाएगी जिसमें शासन प्रशासन का ध्यान परिक्रमा पड़ाव व्यवस्था अतिक्रमण एवं जीर्ण शीर्ण मठ मंदिर तीर्थो आदि की ओर केंद्रित कराया जाएगा और उन्हें अस्तित्व में लाने के साथ बिजली पानी मार्ग को भी दुरुस्त कराया जाएगा जिससे आने वाले समय में परिक्रमतियों को समस्याओं का सामना न करना पड़े#

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