#हरदोई:- मनरेगा के तकनीकी सहायक संकट में! समीक्षा बैठकों के बीच जमीनी अमले को मानदेय का इंतज़ार#
#हरदोई:- मनरेगा के तकनीकी सहायक संकट में! समीक्षा बैठकों के बीच जमीनी अमले को मानदेय का इंतज़ार#
#हरदोई: एक ओर उच्च अधिकारी वातानुकूलित कमरों में बैठकर योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट और समीक्षा बैठकों में उपलब्धियों के आंकड़े प्रस्तुत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हीं योजनाओं को ज़मीन पर लागू कराने वाले कर्मचारी आर्थिक तंगी, मानसिक तनाव और अनिश्चित भविष्य से जूझ रहे हैं। मामला है महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तकनीकी सहायकों का, जिन्हें अक्टूबर से फरवरी तक का मानदेय अब तक प्राप्त नहीं हुआ है। ग्रामीण रोजगार और विकास की रीढ़ मानी जाने वाली मनरेगा में तकनीकी सहायकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। मेजरमेंट बुक का संधारण, प्राक्कलन तैयार करना, गुणवत्ता नियंत्रण, कार्यों का मापन, मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग इन सभी जिम्मेदारियों का भार उन्हीं के कंधों पर है#
#इसके बावजूद वित्तीय वर्ष 2024-25 में कई ब्लॉकों में मानदेय का भुगतान लंबित है#
#माधौगंज – फरवरी-मार्च (2 माह#
#पिहानी – मार्च (1 माह#
#संडीला – जनवरी-फरवरी-मार्च (3 माह#
#मल्लावां – मार्च (1 माह#
#टोडरपुर – फरवरी-मार्च (2 माह#
#कछौना – मार्च (1 माह#
#भरखनी – जनवरी-फरवरी-मार्च (3 माह#
#शाहाबाद – मार्च (1 माह#
#तकनीकी सहायकों का नियत मानदेय 12,192 रुपये प्रतिमाह है, लेकिन समय पर भुगतान दुर्लभ हो चुका है। होली जैसे प्रमुख त्योहार के नजदीक होने के बावजूद वे बच्चों की फीस, राशन और दवाइयों के खर्च को लेकर चिंतित हैं#
#ईपीएफ कट रहा, पर भविष्य धुंधला#
#तकनीकी सहायकों के अनुसार 2015 से ईपीएफ कटौती के आदेश लागू हैं। कटौती तो नियमित हो रही है, किंतु लाभ मिलने की स्पष्ट स्थिति नहीं है। न यात्रा भत्ता, न वाहन सुविधा और न ही अतिरिक्त संसाधन जमीनी स्तर पर कार्य करने के बावजूद उन्हें किसी प्रकार का समुचित सहयोग नहीं मिल पा रहा#
#तकनीकी सहायकों का कहना है कि वैकल्पिक रोजगार न होने के कारण वे नौकरी छोड़ भी नहीं सकते और मानदेय के अभाव में सम्मानजनक जीवन भी नहीं जी पा रहे। उनका आरोप है कि यह स्थिति सरकारी सेवा से अधिक “आधुनिक बंधुआ मजदूरी” जैसी प्रतीत होने लगी है#
#प्रशासन की चुप्पी#
#अब तक संबंधित अधिकारियों की ओर से भुगतान में देरी के कारणों पर स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। तकनीकी सहायकों ने शासन से तत्काल लंबित मानदेय जारी करने, ईपीएफ की पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा कार्य की प्रकृति के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्रामीण विकास की योजनाओं की सफलता के लिए आवश्यक है कि जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों का मनोबल और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। अन्यथा योजनाओं की कागजी प्रगति और धरातलीय वास्तविकता के बीच का अंतर और गहराता जाएगा#

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