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#हरदोई:- हस्ताक्षर पुराने, घोटाले नए: अहिरोरी में पंचायती राज का अजूबा#


#हरदोई:- हस्ताक्षर पुराने, घोटाले नए: अहिरोरी में पंचायती राज का अजूबा#

#नई सचिव की तैनाती के बाद भी पूर्व सचिव ने गबन करने के लिए काट दिए 04 लाख के चेक, जांच शुरू#

#हरदोई: विकास खंड अहिरोरी की ग्राम पंचायत गोपालपुर में सरकारी धन की बंदरबांट का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पंचायती राज व्यवस्था की शुचिता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। यहाँ 'कुर्सी' बदल गई, लेकिन पुराने सचिव की 'कलम' नहीं रुकी। नई सचिव की तैनाती के डेढ़ महीने बाद पूर्व सचिव के हस्ताक्षरों से लाखों का भुगतान कर दिया गया। इस घोटाले को दबाने के लिए ऑडियो और लेटर पैड का सहारा लेकर वर्तमान सचिव की घेराबंदी की जा रही है#

#क्या है पूरा मामला जानकारी के अनुसार आकांक्षा सिंह ने 18 दिसंबर 2025 को ग्राम पंचायत गोपालपुर में बतौर ग्राम सचिव कार्यभार ग्रहण किया था। नियमानुसार कार्यभार ग्रहण करने के बाद वित्तीय अधिकार वर्तमान सचिव के पास होने चाहिए। लेकिन, नियमों को ताक पर रखकर 28 जनवरी 2026 को 'रियाज वस्त्र उद्योग' नामक फर्म को करीब 4 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस चेक पर वर्तमान सचिव के नहीं, बल्कि पूर्व सचिव अंशुमान सिंह और ग्राम प्रधान के संयुक्त हस्ताक्षर थे#

#साजिशों का बुना गया जाल: जब वर्तमान सचिव आकांक्षा सिंह को बैंक रिकॉर्ड से इस फर्जीवाड़े की भनक लगी, तो उन्होंने 16 फरवरी 2026 को खंड विकास अधिकारी (BDO) अहिरोरी को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की। भ्रष्टाचार की कलई खुलते देख ग्राम प्रधान ने सचिव पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया। जब बात नहीं बनी, तो रसूख का इस्तेमाल कर जनप्रतिनिधियों को गुमराह किया गया और उनके लेटर पैड पर सचिव के विरुद्ध शिकायतें लिखवाई गईं#

#सचिव आकांक्षा सिंह का कहना है कि "मैंने ईमानदारी से भ्रष्टाचार की शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन अब मुझे डराने और छवि धूमिल करने के लिए फर्जी ऑडियो वायरल किए जा रहे हैं#

#गंभीर सवाल: दिसंबर में नई तैनाती के बाद जनवरी में बैंक ने पुराने सचिव के हस्ताक्षर कैसे स्वीकार किए? क्या यह भुगतान वास्तव में किसी सामग्री की आपूर्ति के लिए था या केवल सरकारी खजाने में सेंधमारी? एक महिला कर्मचारी की आवाज दबाने के लिए 'कथित ऑडियो' और रसूखदारों के लेटर पैड का इस्तेमाल क्यों#

#मामला संज्ञान में आने के बाद जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो बैंक से भुगतान संबंधी दस्तावेजों की मांग की गई है। यदि आरोप सही पाए गए, तो पूर्व सचिव और प्रधान पर गबन की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज होना तय है#

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