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#हरदोई:- संवेदनाओं की आवाज़ बनीं नीलिमा देशवाल, कविता ‘अनंत मिलन’ से मिला नया आयाम#


#हरदोई:- संवेदनाओं की आवाज़ बनीं नीलिमा देशवाल, कविता ‘अनंत मिलन’ से मिला नया आयाम#

#अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष#

#हरदोई: समाज सेवा की ऊबड़-खाबड़ पगडंडियों पर जब कोई व्यक्तित्व अपनी निष्ठा से फूल खिलाता है, तो उसकी महक दूर तक जाती है। जनपद की पहचान बन चुकीं नीलिमा देशवाल (विभाग मंत्री, सेवा भारती एवम प्रांतीय संगठन मंत्री प्राथमिक शिक्षक संघ) आज केवल एक पद का नाम नहीं, बल्कि संघर्ष और सेवा का पर्याय बन चुकी हैं#

#शिक्षक संघ की प्रांतीय संगठन मंत्री के रूप में शिक्षा जगत को नई दिशा देने के साथ-साथ, वे समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की मुखर आवाज़ भी हैं। हाल ही में नीलिमा की कलम से निकली एक कविता "अनंत मिलन" ने साहित्य और अध्यात्म के गलियारों में हलचल मचा दी है। यह कविता मात्र शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि एक साधक की उस पुकार जैसी है जो प्रयाग, काशी और हरिद्वार के घाटों से होती हुई परमात्मा में विलीन हो जाने की छटपटाहट दिखाती है#

#कविता के दर्पण में सेवा का प्रतिबिंब#

#नीलिमा देशवाल का जीवन 'नर सेवा ही नारायण सेवा' के सिद्धांत पर टिका है। उनकी कविता की पंक्तियाँ— "जहाँ दो धाराओं का मिलन केवल स्पर्श नहीं, बल्कि अस्तित्व का पूर्ण विसर्जन हो जाए", शायद उनके उस समर्पण को दर्शाती हैं जो वे गरीबों और वंचितों की सेवा में करती रही हैं#

#एक सजग प्रहरी की तरह वे हरदोई की महिलाओं के लिए आज प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत हैं। "जब हृदय की धड़कनें आरती के शंखनाद में बदल जाती हैं, तभी निस्वार्थ सेवा का जन्म होता है। नीलिमा की यह कविता उनके भीतर के इसी विराट व्यक्तित्व को उजागर करती है#

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