#लखनऊ:- अनुकंपा नियुक्ति सिर्फ मूल परिवार तक सीमित, बाद में जुड़े सदस्य नहीं कर सकेंगे दावा/ हाईकोर्ट#
#लखनऊ:- अनुकंपा नियुक्ति सिर्फ मूल परिवार तक सीमित, बाद में जुड़े सदस्य नहीं कर सकेंगे दावा/ हाईकोर्ट#
#विधवा बहू का दावा खारिज, कोर्ट ने कहा- मृत्यु के समय परिवार में शामिल सदस्य ही पात्र#
#लखनऊ: इलाहाबाद- हाई कोर्ट लखनऊ खंडपीठ ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर अहम और स्पष्ट फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि कर्मचारी की मृत्यु के समय जो सदस्य परिवार में शामिल थे, वही अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र होंगे। बाद में परिवार में शामिल होने वाले व्यक्तियों को इस आधार पर नियुक्ति का अधिकार नहीं मिलेगा#
#जस्टिस राजन राय और जस्टिस ए के चौधरी की खंडपीठ ने यह फैसला दीपिका तिवारी की विशेष अपील खारिज करते हुए सुनाया। मामला सहायक अध्यापिका संगीता बाजपेई की मृत्यु से जुड़ा है, जिनका निधन 23 अप्रैल 2021 को सेवाकाल के दौरान हुआ था। उस समय उनके परिवार में पति और बेरोजगार पुत्र निखिल बाजपेई शामिल थे। निखिल ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, लेकिन पिता के पेंशनभोगी होने के आधार पर आवेदन खारिज कर दिया गया#
#इसके बाद 15 फरवरी 2023 को निखिल का विवाह दीपिका तिवारी से हुआ, लेकिन कुछ ही महीनों बाद 13 मई 2023 को निखिल की भी मृत्यु हो गई। इसके बाद दीपिका तिवारी ने स्वयं को विधवा बहू बताते हुए अनुकंपा नियुक्ति की मांग की, जिसे कोर्ट ने ठुकरा दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य तत्काल आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवार को राहत देना है, न कि बाद में जुड़े व्यक्तियों को इसका लाभ देना#

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