#बेंगलुरु:- गायत्री यज्ञ में गूंजे वैदिक ममंत्रोच्चार के साथ संस्कारों के संदेश#
#बेंगलुरु:- गायत्री यज्ञ में गूंजे वैदिक ममंत्रोच्चार के साथ संस्कारों के संदेश#
#बेंगलुरु: रायसंद्रा क्षेत्र में आयोजित भव्य गायत्री यज्ञ में आध्यात्म और विज्ञान का अद्भुत संगम देखने को मिला। यज्ञ का संचालन कर रहे अतुल कपूर ने अपने उद्बोधन में कहा कि आधुनिक जीवनशैली के बीच परिवारों में संस्कारों की परंपरा को पुनः जीवित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि संस्कार ही व्यक्ति के चरित्र निर्माण की आधारशिला होते हैं, जो समाज को सशक्त और संतुलित बनाते हैं#
#इस अवसर पर गायत्री मंत्र की वैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत करते हुए उन्होंने बताया कि “ॐ भूर्भुवः स्वः…” मंत्र केवल आध्यात्मिक साधना ही नहीं, बल्कि मानव मस्तिष्क और चेतना को जागृत करने का एक प्रभावशाली माध्यम है। उन्होंने समझाया कि मंत्रोच्चारण से उत्पन्न ध्वनि तरंगें मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को सक्रिय करती हैं, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक तनाव कम होता है। साथ ही, नियमित जप से एकाग्रता, स्मरण शक्ति और निर्णय क्षमता में वृद्धि होती है#
#उन्होंने यह भी बताया कि यज्ञ में दी जाने वाली आहुतियां वातावरण को शुद्ध करने के साथ-साथ औषधीय गुणों का प्रसार करती हैं, जिससे वायु प्रदूषण में कमी आती है और स्वास्थ्य लाभ मिलता है। यह पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत उपयोगी है#
गायत्री यज्ञ का आयोजन सिद्धांत गुप्ता द्वारा किया गया। सभी ने गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र के साथ विधिवत आहुतियां अर्पित कीं और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया#
#कार्यक्रम के दौरान संस्कारों की गहराई और उनके वैज्ञानिक महत्व को सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और हर्ष व्यक्त किया। अंत में पूर्णाहुति एवं शांति पाठ के साथ यज्ञ का समापन हुआ, जिसमें सभी ने विश्व शांति और मानव कल्याण की कामना की#

No comments