#सीतापुर:- नैमिषारण्य- कंस के अत्याचार से भगवान श्रीकृष्ण ने लिया अवतार: ब्यास-अनुष्का पाठक#
#सीतापुर:- नैमिषारण्य- कंस के अत्याचार से भगवान श्रीकृष्ण ने लिया अवतार: ब्यास-अनुष्का पाठक#
#सीतापुर: नैमिषारण्य- स्थित नारदानंद आश्रम में शांति कुटी के समीप चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन सोमवार को कथा वाचक ने कंस वध व रुकमणि विवाह की कथा सुनाई। इस दौरान भारी संख्या में श्रोता मौजूद रहे। प्रसिद्ध, लोकप्रिय बाल कथा वाचक अनुष्का पाठक ने कहा कि भगवान विष्णु के पृथ्वी लोक में अवतरित होने के प्रमुख कारण थे। जिसमें एक कारण कंस वध भी था। कंस के अत्याचार से पृथ्वी पर त्राहि त्राहि होने लगी। लोग भगवान से गुहार लगाने लगे तब श्रीकृष्ण अवतरित हुए। कंस को यह पता था कि उसका वध श्रीकृष्ण के हाथाें ही होना निश्चित है। इसलिए उसने बाल्यावस्था में ही श्रीकृष्ण को अनेक बार मरवाने का प्रयास किया। लेकिन हर प्रयास भगवान के सामने असफल साबित होते रहे। 11 साल की अल्प आयु में कंस ने अपने प्रमुख अक्रूर द्वारा मल्ल युद्ध के बहाने कृष्ण, बलराम को मथुरा बुलवाकर शक्तिशाली योद्धा और पागल हाथियाें से कुचलवाकर मारने का प्रयास किया। लेकिन वह सभी श्रीकृष्ण और बलराम के हाथाें मारे गए। अंत में श्रीकृष्ण ने अपने मामा कंस का वध कर मथुरा नगरी को कंस के अत्याचाराें से मुक्ति दिला दी। कंस वध के बाद श्रीकृष्ण ने अपने माता-पिता वसुदेव और देवकी को जहां कारागार से मुक्त कराया। वहीं कंस के द्वारा अपने पिता उग्रसेन महाराज को भी बंदी बनाकर कारागार में रखा था। उन्हें भी श्रीकृष्ण ने मुक्त कराकर मथुरा के सिंहासन पर बैठाया। बताया कि रुकमणि जिन्हें माता लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। जो विष्णु रुपी श्रीकृष्ण से विवाह करने को इच्छुक थीं। लेकिन रुकमणि के पिता व भाई इससे सहमत नहीं थे। कथा का संगीतमयी वर्णन सुन श्रोता झूमने लगे। इस दौरान मुख्य यजमान आलोक अस्थाना, परीक्षित महेंद्र प्रताप सिंह उर्फ रानू एवं मोना सिंह ने भागवत पोथी, वेदी और आचार्य का विधि-विधान से पूजन-आरती की। शांति कुटी आश्रम के महंत स्वामी शास्वतानंद जी महाराज भी मंच पर मौजूद रहे। आयोजक राम स्वरूप दास ने सभी भक्तों का आभार व्यक्त करते हुए आगामी समापन दिन की कथा में भी उपस्थित रहने की अपील की। इस अवसर पर क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्ति और भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे#

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