मोदी सरकार का खुमार देश की जनता से अच्छे दिनों का सपना देखते-देखते उतरने लगा है? ।राष्ट्रीय मुद्दों पर धार देते-देते अब स्थानीय विकास के मुद्दों पर मोदी 2 सरकार घिरने लगी है
अब जनता का खुमार उतरने लगा है अच्छे दिनों का
मोदी सरकार का खुमार देश की जनता से अच्छे दिनों का सपना देखते-देखते उतरने लगा है? ।राष्ट्रीय मुद्दों पर धार देते-देते अब स्थानीय विकास के मुद्दों पर मोदी 2 सरकार घिरने लगी है जिसका ताजा उदाहरण महाराष्ट्र एवं हरियाणा के चुनाव के साथ देश में हुए विभिन्न प्रदेशों के रिक्त विधान सभा व लोक सभा चुनाव में मोदी सरकार को आइना दिखाया है ? यदि भविष्य में जनता को सिर्फ सपनें दिखाते रहोंगे तो राजनीति में भाजपा का सफाया होते देर नहीं लगेगी ।
महाराष्ट्र और हरियाणा चुनाव परिणामों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए माकपा ने कहा है कि जब लोग मुश्किल में रह रहे हों तो कट्टर राष्ट्रवाद काम नहीं आता ।
माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा है कि सिर्फ इन दो राज्यों के ही नहीं बल्कि गुजरात,बिहार,केरल और उत्तर प्रदेश में हुए उपचुनावों के परिणाम भी यह दिखाते हैं कि जब लोग नौकरियों और आर्थिक मंदी के कारण मुश्किल में हो तो सांप्रदायिक कट्टर वाद काम नहीं आता ?
महाराष्ट्र के चुनाव प्रचार अभियान में 220 सीटों के लक्ष्य को पार करने के लिये छाती पीट रहे थे और हरियाणा में 75 प्लस की बात कर रहे थे ।लेकिन जनता ने भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व का घमंड बिना किसी विरोधी दल के चकनाचूर कर दिया है वेबस क्षेत्रीय दलों की चरण वंदना कर रहे हैं। कहां गया सौ सालों तक राज्य करने का सपना ?
इस चुनाव में देश की जनता ने भाजपा को पीछे ढकेल दिया है ।
दोनों राज्यों के चुनाव परिणाम और उप चुनाव के परिणामों को देखते हुए भाकपा महासचिव डी राजा ने कहा है कि देश के की जनता ने उन्हे अपना फैसला सुनाया है कि जनता को हल्के में नहीं लिया जा सकता है । जनता ने भाजपा को बता दिया है कि असली मुद्दे क्या है -बेरोजगारी,रूपये में गिरावट,कीमतों में वृद्धि और आजीविका के मसले न कि एनआरसी और अनुच्छेद-370 जिन पर भाजपा का चुनावी अभियान आधारित था । यह चुनाव भाजपा के पराभव की शुरुआत है । आने वाले समय में वे पूरी तरह से एक्सपोज हो जायेगें ।
भाकपा -माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने ट्वीट किया कि हरियाणा और महाराष्ट्र में सरकार का स्वरूप कुछ भी हो, लेकिन हम कह सकते हैं कि बेरोजगारी और कृषि संकट, अनुच्छेद 370 और सावरकर पर कहीं ज्यादा भारी सावित हुए है ।
वैसे कई अन्य राजनैतिक जानकारों का कहना है कि यदि हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव में कांग्रेस कोमा से निकलकर चुनाव लड़ती तो भाजपा को आसानी से हराया जा सकता था।
सम्पादक: खोज जारी है न्यूज चैनल/ हिन्दी दैनिक समाचार पत्र/ की खास खबर:
मोदी सरकार का खुमार देश की जनता से अच्छे दिनों का सपना देखते-देखते उतरने लगा है? ।राष्ट्रीय मुद्दों पर धार देते-देते अब स्थानीय विकास के मुद्दों पर मोदी 2 सरकार घिरने लगी है जिसका ताजा उदाहरण महाराष्ट्र एवं हरियाणा के चुनाव के साथ देश में हुए विभिन्न प्रदेशों के रिक्त विधान सभा व लोक सभा चुनाव में मोदी सरकार को आइना दिखाया है ? यदि भविष्य में जनता को सिर्फ सपनें दिखाते रहोंगे तो राजनीति में भाजपा का सफाया होते देर नहीं लगेगी ।
महाराष्ट्र और हरियाणा चुनाव परिणामों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए माकपा ने कहा है कि जब लोग मुश्किल में रह रहे हों तो कट्टर राष्ट्रवाद काम नहीं आता ।
माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा है कि सिर्फ इन दो राज्यों के ही नहीं बल्कि गुजरात,बिहार,केरल और उत्तर प्रदेश में हुए उपचुनावों के परिणाम भी यह दिखाते हैं कि जब लोग नौकरियों और आर्थिक मंदी के कारण मुश्किल में हो तो सांप्रदायिक कट्टर वाद काम नहीं आता ?
महाराष्ट्र के चुनाव प्रचार अभियान में 220 सीटों के लक्ष्य को पार करने के लिये छाती पीट रहे थे और हरियाणा में 75 प्लस की बात कर रहे थे ।लेकिन जनता ने भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व का घमंड बिना किसी विरोधी दल के चकनाचूर कर दिया है वेबस क्षेत्रीय दलों की चरण वंदना कर रहे हैं। कहां गया सौ सालों तक राज्य करने का सपना ?
इस चुनाव में देश की जनता ने भाजपा को पीछे ढकेल दिया है ।
दोनों राज्यों के चुनाव परिणाम और उप चुनाव के परिणामों को देखते हुए भाकपा महासचिव डी राजा ने कहा है कि देश के की जनता ने उन्हे अपना फैसला सुनाया है कि जनता को हल्के में नहीं लिया जा सकता है । जनता ने भाजपा को बता दिया है कि असली मुद्दे क्या है -बेरोजगारी,रूपये में गिरावट,कीमतों में वृद्धि और आजीविका के मसले न कि एनआरसी और अनुच्छेद-370 जिन पर भाजपा का चुनावी अभियान आधारित था । यह चुनाव भाजपा के पराभव की शुरुआत है । आने वाले समय में वे पूरी तरह से एक्सपोज हो जायेगें ।
भाकपा -माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने ट्वीट किया कि हरियाणा और महाराष्ट्र में सरकार का स्वरूप कुछ भी हो, लेकिन हम कह सकते हैं कि बेरोजगारी और कृषि संकट, अनुच्छेद 370 और सावरकर पर कहीं ज्यादा भारी सावित हुए है ।
वैसे कई अन्य राजनैतिक जानकारों का कहना है कि यदि हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव में कांग्रेस कोमा से निकलकर चुनाव लड़ती तो भाजपा को आसानी से हराया जा सकता था।
सम्पादक: खोज जारी है न्यूज चैनल/ हिन्दी दैनिक समाचार पत्र/ की खास खबर:
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