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#हरदोई:- बेनीगंज- जब गर्गाचार्य ने रखा श्रीकृष्ण का नाम तो यशोदा मैया को नहीं आया पसंद#


#हरदोई:- बेनीगंज- जब गर्गाचार्य ने रखा श्रीकृष्ण का नाम तो यशोदा मैया को नहीं आया पसंद#

#हरदोई : बेनीगंज- कस्बे के सिकलिंग टोला स्थित ब्रह्मदेव स्थान पर पंडित गौतमाचार्य शुक्ल द्वारा भगवान श्री कृष्ण के नाम करण का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि एक दिन वासुदेव प्रेरणा से कुल पुरोहित गर्गाचार्य गोकुल में पधारे। नन्द यशोदा ने आदर सत्कार किया।नन्द यशोदा ने नामकरण का अनुरोध किया।यशोदा के हाथ में बच्चे को देख गर्गाचार्य कहने लगे ये रोहिणी का पुत्र है इसलिए एक नाम रौहणेय होगा अपने गुणों से सबको आनंदित करेगा तो एक नाम राम होगा और बल में इसके समान कोई ना होगा तो एक नाम बल भी होगा मगर सबसे ज्यादा लिया जाने वाला नाम बलराम होगा।अब जैसे ही रोहिणी की गोद के बालक को देखा तो गर्गाचार्य मोहिनी मुरतिया में खो गए अपनी सारी सुधि भूल गए खुली आंखों से प्रेम समाधि लग गयी।यह देख बाबा यशोदा घबरा गए हिलाकर पूछने लगे बाबा क्या हुआ? गर्गाचार्य को होश आया है और एकदम बोल पड़े नन्द तुम्हारा बालक कोई साधारण इंसान नहीं यह तो,यह कहते हुए जैसे ही उन्होंने अंगुली उठाई तभी कान्हा ने आंख दिखाई।कहने वाले थे गर्गाचार्य कि यह तो साक्षात् भगवान हैं।तभी कान्हा ने आंखों ही आंखों में गर्गाचार्य को धमकाया है बाबा मेरे भेद नहीं खोलना।मैं जानता हूं बाबा यहां दुनिया भगवान का क्या करती है उसे पूज कर अलमारी में बंद कर देती है और मैं अलमारी में बंद होने नहीं आया हूं, मैं तो माखन मिश्री खाने आया हूं, मां की ममता में खुद को भिगोने आया हूं गर आपने भेद बतला दिया मेरा हाल क्या होगा यह मैंने तुम्हें समझा दिया। अब गर्गाचार्य बोल उठे आपके इस बेटे के नाम अनेक होंगे जैसे कर्म करता जाएगा वैसे नए नाम होते जाएंगे लेकिन क्योंकि इसने इस बार काला रंग पाया है इसलिए इसका एक नाम कृष्ण होगा इससे पहले यह कई रंगों में आया है। मैया बोली बाबा कोई आसान नाम बतला देना तब गर्गाचार्य कहने लगे मैया तुम इसे कन्हैया, कान्हा, किशन या किसना कह लेना। यह सुन मैया मुस्कुरा उठी और सारी उम्र कान्हा कहकर बुलाती रही#

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