#हरदोई:- पाली- 11 पाकिस्तानियों को ढेरकर शहीद हुआ था आबिद#
#हरदोई:- पाली- 11 पाकिस्तानियों को ढेरकर शहीद हुआ था आबिद#
#हरदोई:- पाली- 23 साल के लंबे सफर के बाद भी कारगिल के शहीद आबिद खान की कुर्बानी लोगों के जेहन में ताजा है 17 जुलाई 1999 को अकेले ही 11 पाकिस्तानियों को मौत की नींद सुला कर पाली के इस लाल ने शहादत का जाम पिया था। देश पर परी नापाक निगाहों को जो शहीद आबिद खान हमेशा के लिए देश का नूर बन गया उसकी बहादुरी और कुर्बानी की बातें आज भी लोगों की जुबान पर हैं। बचपन में खेत में रोपी गई आबिद की बंदूक ने जवानी में देश की सीमा पर ऐसे शोले उगले की दुश्मन नेस्तनाबूद हो गए अकेले ही मोर्चे पर 11 दुश्मनों से भिड़े देश के इस सपूत ने हमेशा हमेशा के लिए अपना नाम शहीदों में दर्ज करवा लिया 16 मई 1972 को पाली के मोहल्ला काजी सराय में गफ्फार खां और नत्थन बेगम के घर में पैदा होने वाले इस अमर शहीद ने 27 साल की उम्र में ही देश की रक्षा की खातिर जो अपना खून बहाया उसकी लाली अब भी उसकी कुर्बानी की याद दिलाती है।एक आम किसान के घर में जन्मे नटखट आबिद को बचपन से ही बंदूकों से प्यार था पिता खेत पर जाते समय कंधों पर फावड़ा रखते और नन्ना आबिद अपने नाजुक अंगों पर खिलौने की बंदूक लेकर उनके पीछे हो लेता था। पिता खेत में धान के पौधे रोपते तो देखा देखी में वह अपनी बंदूक को रोपने की कोशिश करता था।पूछने पर कहता आपके धान से चावल निकलेंगे जो भूखे पेट को भरेंगे और मेरी बंदूक से गोलियां निकलेगी जो दुश्मनों को मारेंगे बचपन में कहीं गई यह शरारत की बातें वाकई सच हो जाएंगी इसका गुमान तो आबिद के पिता को नहीं था लेकिन आबिद बचपन से ही दुश्मनों से लोहा लेने की बात करता था देश की सरहद पर मातृभूमि की रक्षा के लिए लड़कर प्राण गंवाने वाले शहीद आबिद खान जब पाक सैनिकों से लोहा ले रहे थे उस समय ना तो वह हिंदू थे और ना ही मुसलमान उस समय वह केवल भारत माता के वीर सपूत थे उनके दिलो-दिमाग में सिर्फ और सिर्फ एक ही जज्बा था कि उन्हें हर हाल में दुश्मनों को परास्त करना है हुआ भी यही पाली कस्बे के इस लाल ने अकेले 11 पाक सैनिकों को मार गिराया और आखिरकार उसे अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी।दुश्मनों की गोलियां उसके सीने को पार कर गई और देश का यह सपूत भारत माता की गोद में सदा सदा के लिए सो गया#

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