#गौतमबुद्धनगर:- जिला वनाधिकारी की विदाई का उत्सव#
#गौतमबुद्धनगर:- जिला वनाधिकारी की विदाई का उत्सव#
#गौतमबुद्धनगर: 36 वर्ष 4 माह के समय की लंबाई चौड़ाई कितनी होती है? मैंने अपने लगभग साढ़े तीन दशक लंबे पत्रकारिता के जीवन में सैकड़ों वरिष्ठ कनिष्ठ अधिकािरयों से व्यवहार किया है। उनमें से अनेक सत्ता और शासन के विद्युत प्रवाह से चमकने वाले अधिकारी थे और कुछ स्वयं की मेधा से दमकने वाले। स्वयं की मेधा से दमकने वाले ऐसे ही एक अधिकारी से मेरा परिचय लगभग डेढ़ वर्ष पहले हुआ था। हालांकि यह अधिकारी जनपद गौतमबुद्धनगर में पिछले सात वर्षों से कार्यरत था। जिला वनाधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त प्रमोद कुमार श्रीवास्तव से एक दो मुलाकात के बाद ही यह समझ में आ गया कि बेहद मिलनसार और सहृदय यह अधिकारी अपने पद की गरिमा और मर्यादा के साथ कोई समझौता नहीं करता है।जिले में संचालित एक बड़ी परियोजना के आड़े आ रहे कुछ वृक्षों को हटाने के मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय से उन्हें ट्रांसफर करने की धमकी वाला फोन आया। उन्होंने बहुत विनम्रता से कहा,-नये नियुक्त होने वाले अधिकारी को समझने में भी समय लगेगा। मैं तो तत्काल यह काम कर दूंगा परंतु इसके लिए नियमानुसार कागज तो भिजवा दें।' गौतमबुद्धनगर के साथ हापुड़ और गाजियाबाद के वनाधिकारी का काफी समय तक अतिरिक्त कार्यभार संभालने वाले प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की वन विभाग में 36 वर्ष 4 माह की सेवा यात्रा की कल सांझ हो गई।नोएडा के गोल्फ कोर्स में आयोजित उनके विदाई समारोह में उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव मनोज सिंह समेत तमाम अधिकारी जुटे। सभी ने उनके कार्यकाल और कार्यकुशलता की भूरी भूरी प्रशंसा की। उनके कार्यालय के छोटे बड़े सभी कर्मचारी अधिकारियों ने उन्हें भावों से भरे उपहार दिए और दूसरी पारी में स्वस्थ रहने की शुभकामनाएं दीं तो आगे भी मार्गदर्शक बने रहने की अपील की।अंत में स्वयं प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा,-मैं अपने वरिष्ठ अधिकारियों के कुशल निर्देशन और मातहतों के सहयोग से सफलता पूर्वक अपने दायित्वों को पूरा कर पाया। मैं उन अधिकारियों में से नहीं हूं जो अपने कार्यालय के साथियों से जाने अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगते हैं। मैंने यदि किसी साथी को कभी कुछ अप्रिय कहा भी तो वह पद की आवश्यकता रही होगी#

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