#आगरा:- फतेहपुर सीकरी में गहराता जा रहा है भूजल संकट, बढ़ा प्रदूषण#
#आगरा:- फतेहपुर सीकरी में गहराता जा रहा है भूजल संकट, बढ़ा प्रदूषण#
#आगरा: विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक नगरी फतेहपुर सीकरी और इसके आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल प्रदूषण का स्तर चिंताजनक रूप से बढ़ रहा है। क्षेत्र का भूजल न केवल नीचे जा रहा है, बल्कि अत्यधिक खारेपन और फ्लोराइड के खतरनाक स्तर से भी दूषित हो चुका है। भारत सरकार की ओर से जल स्तर की गिरावट रोकने के लिये अनेक गंभीर प्रयास किये जा रहे है और अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं क्रियान्वित किये जाने का प्रयास हो रहा है।लेकिन इसके बावजूद जलस्तर और उसकी गुणवत्ता में गिरावट आना जारी है।है।उ प्र ग्रामीण मजदूर संगठन उपरोक्त मौजूदा स्थितियों को लेकर अत्यंत गंभीर है और मानता है कि इनको और अधिक बढ़ने से रोका जाना चाहिये।पर्यावरण विभाग और सिंचाई विभाग को इसके लिए योजना बनानी चाहिये#
#सिंचाई विभाग से अपेक्षा#
#उप्र के सिंचाई विभाग के सिंचाई कार्य मंडल-III, आगरा के तहत अधिशासी अभियंता लोअर खंड आगरा के प्रशासन में फतेहपुर सीकरी विकास खंड क्षेत्र आता है,लेकिन इसकी तेरहमोरी बांध और खारी नदी जैसी जल नियंत्रण एवं जल प्रवाह जैसी योजनाएं उपेक्षित कर रखी गयी हैं।तेरहमोरी बांध जनपद का सबसे बड़ा बांध है किंतु इसके गेट टूटे पडे होने के कारण बडे जलग्राही क्षेत्र से पहुंचने वाला मानसून काल में पहुंचने वाला पानी नहीं रुकता।अगर यह पानी रुकने लगे तो रसातल में पहुंच चुका भूजल स्वत:रिचार्ज हो जायेगा और पानी की गुणवत्ता में भी बदलाव आयेगा। किरावली तहसील के गांवों से होकर बहने वाली खारी नदी के बहाव को तेरह मोरी बांध का डिसचार्ज और भरतपुर जनपद के चिकसाना बांध का डिस्चार्ज नियंत्रित करता है।तेरहमोरी बांध के गेटों के टूटा रहने से नदी मानसून काल में भी लगभग बहाव शून्य सी रहती है।जब तक नदी बहती थी तब तक किरावली तहसील के अधिकांश गांवों हैंड पंप सुचारू थे,कूंओं में से अपने कम में गुणवत्ता वाली पानी मिलता था#
#पंचगाई पट्टी बनने से रोके#
#वर्तमान में फतेहपुर सीकरी विकास खंड के तमाम गांवों में जनपद के सबसे अधिक समस्या ग्रस्त रहे सदर तहसील के गांव ‘पचगईं पट्टी’ जैसी स्थिति बनती जा रही है।जहां कि निम्न गुणवत्ता वाले पानी का उपयोग करने भर से गांव शारीरिक विकलांगता से अभिशप्त हो गया।अब भी यहां के लोगों को उनकी शारीरिक क्षमता को कम आंक कर सेवा योजक रोजगार देने से बचना चाहते हैं। एक श्रमिक नेता के रूप में मुझे यहां के लोगों की शारीरिक विकलांगता के कारण रोजगार को पाने को लेकर बनी चली आ रही समस्या की जानकारी है,इस लिये मैं नहीं चाहता कि फतेहपुर सीकरी की मेहनतकश श्रम शक्ति को भी इस प्रकार की समस्या का सामना करना पडे#
#उप्र ग्रामीण मजदूर संगठन की पहल#
#श्रमिक नेता श्री तुलाराम शर्मा ने बताया कि उप्र ग्रामीण मजदूर संगठन के नेता के रूप में वह श्रम विभाग,स्वास्थ्य विभाग और पर्यावरण विभाग सहित कई अन्य विभागों को पत्र लिय कर चिंता जता चुके हैं।उन्होंने कहा कि पूर्व में फतेहपुर सीकरी क्षेत्र में श्रमिका मुख्य रूप से पत्थर खदानों और चक्की के पाट बनाये जाने का कार्य करते थे किंतु अब ये दोनो ही कार्य दस साल से बंद है,कोई वैकल्पिक श्रम सेवा अवसर क्षेत्र में संभव नहीं हो सका है,इस लिये श्रमिकों को भरतपुर या आगरा जाकर काम ढूंढना पड़ता है,किंतु जैसे ही आधार कार्ड या लेबर कार्ड देखने पर उनके फतेहपुर सीकरी से संबंधित होने की जानकारी सेवा योजक को मिलती है, कार्य अवसर देने वालों का रुख बदल जाया करता है।उपरोक्त को दृष्टिगत श्रम विभाग से अनुरोध है कि उपरोक्त स्थिति शासन के संज्ञान में लाकर श्रमिकों के स्थ्यास्थ्य परीक्षण का शिवरत तो लगवा ही दिये जायें और फतेहपुर सीकरी को पंचगाई पट्टी बनने से रोका जाये#

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