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#हरदोई:- शाहबाद- में सत्ता के आगे बेबस हुआ क़ानून! एसडीएम पर हमले के 02 दिन बाद भी नहीं दर्ज हुई FIR#


#हरदोई:- शाहबाद- में सत्ता के आगे बेबस हुआ क़ानून! एसडीएम पर हमले के 02 दिन बाद भी नहीं दर्ज हुई FIR#

#हरदोई: शाहाबाद- तहसील क्षेत्र के परियल गांव में उप जिलाधिकारी सुशील कुमार मिश्रा पर हुए हमले के कई वीडियो सामने आने के बावजूद अब तक इस प्रकरण में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। दूसरी ओर सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं ने आरोपितों को खुलकर संरक्षण देने का खुला दावा कर रहे हैं। जबकि विपक्षी दलों ने घटना को लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र पर हमला बताते हुए भाजपा सरकार को कठघरे में खड़ा किया है#

#गौरतलब है कि 8 जून को एसडीएम शाहाबाद सुशील कुमार मिश्रा बाढ़ चौकी क्षेत्र का निरीक्षण करने के बाद परियल गांव के निकट स्थित सरकारी अन्नपूर्णा भवन के दुरपयोग एवं आरआरसी सेंटर में अवैध कब्जे और खनन संबंधी शिकायतों की जानकारी लेने पहुंचे थे। इसी दौरान ग्राम प्रधान शिवरानी और जिला पंचायत सदस्य लालाराम के पुत्र उदयवीर राजपूत के बीच कहासुनी होने की बात सामने आई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार प्रधानपुत्र द्वारा एसडीएम से अभद्रता करने पर सुरक्षा कर्मियों ने हस्तक्षेप किया, जिसके बाद प्रधानपुत्र की सह पर महिलाओं और बच्चों को उकसाकर सरकारी टीम पर हमला कर दिया गया। इसके बाद स्थिति और बिगड़ गई तथा पथराव शुरू हो गया। एक पत्थर एसडीएम सुशील कुमार मिश्रा के सिर में जा लगा, जिससे वे घायल हो गए#

#वायरल वीडियो में सरकारी टीम पर लाठी डंडो से हमला हमला जैसे दृश्य भी दिखाई दे रहे हैं। महिलाओं ने गाड़ी फूँक देने की बात कही जो स्पष्ट सुनाई दे रही है। आरोप यह भी है कि हमलावरों ने सरकारी वाहन को नुकसान पहुंचाया और टीम के कुछ सदस्यों के मोबाइल फोन भी छीन लिए। घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया और अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर भेजा गया।घटना के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच के निर्देश दिए थे। जिलाधिकारी ने निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही थी। वहीं पुलिस ने भी वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर हमले में शामिल लोगों की पहचान किए जाने की बात कही थी। हालांकि घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं होने से कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं#

#सोशल मीडिया पर आई प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट हुआ कि सत्ता पक्ष के वर्तमान एवं पूर्व जिलाध्यक्ष समेत कुछ प्रभावशाली नेताओं द्वारा आरोपितों को खुला संरक्षण दिया जा रहा है। इसी कारण कार्रवाई की प्रक्रिया प्रभावित हुई, और घटना के 02 दिन बाद भी मामले में प्राथमिकी तक दर्ज नहीं की गई है। उधर, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि एक उप जिलाधिकारी और प्रशासनिक टीम पर खुलेआम हमला होता है, अधिकारी घायल होता है, घटना के वीडियो सार्वजनिक हो जाते हैं, फिर भी मुकदमा दर्ज नहीं होता, तो यह कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सरकार राजनीतिक दबाव के कारण निष्पक्ष कार्रवाई करने से बच रही है#

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