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#लखनऊ:- 2027 के महासंग्राम में उतरी 'विकासवादी इंडियन पार्टी महामोर्चा', 400 सीटों पर चुनाव लड़ने का किया ऐलान#


#लखनऊ:- 2027 के महासंग्राम में उतरी 'विकासवादी इंडियन पार्टी महामोर्चा', 400 सीटों पर चुनाव लड़ने का किया ऐलान#

#लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में लखनऊ के प्रेस क्लब, हज़रतगंज में 'विकासवादी इंडियन पार्टी महामोर्चा' ने एक महत्वपूर्ण बैठक और प्रेसवार्ता का आयोजन किया। इस दौरान पार्टी ने आगामी चुनाव के लिए अपनी स्पष्ट रणनीति और चुनावी एजेंडे को जनता के सामने रखा#

#400 सीटों पर दम दिखाएगी पार्टी

प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय जनता सहारा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और महामोर्चा के प्रमुख रणनीतिकार अनिल कुमार त्रिपाठी ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि विकासवादी इंडियन पार्टी महामोर्चा आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की कुल 400 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। त्रिपाठी ने विश्वास जताया कि पार्टी प्रदेश भर में एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरकर सामने आएगी#

#महंगाई, बेरोज़गारी और भयमुक्ति मुख्य मुद्दा#

#प्रेसवार्ता के दौरान पार्टी का मुख्य फोकस जनहित के उन ज्वलंत मुद्दों पर रहा जिनसे प्रदेश की आम जनता सीधे तौर पर प्रभावित है। अनिल कुमार त्रिपाठी ने कहा कि 'विकासवादी इंडियन पार्टी महामोर्चा' का एजेंडा सत्ता का सुख भोगना नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं का समाधान करना है। उन्होंने अपने संबोधन में निम्नलिखित तीन प्रमुख बिंदुओं को चुनावी आधार बताया#

#महंगाई: आम आदमी की थाली से लेकर जरूरी संसाधनों तक बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाना।

बेरोज़गारी: प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना और शिक्षा को रोजगारपरक बनाना।

भयमुक्त समाज: समाज में व्याप्त भय के माहौल को जड़ से खत्म कर कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करना।

कार्यकर्ताओं में जोश

प्रेस क्लब में आयोजित इस बैठक में पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। नेताओं ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि जनता के बीच जाकर इन मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाया जाए और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया जाए#

#2027 के चुनाव को देखते हुए 'विकासवादी इंडियन पार्टी महामोर्चा' का यह कदम राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि जनता इस नए महामोर्चा के एजेंडे को किस हद तक स्वीकार करती है#

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