#हरदोई: पिहानी- एमआरपी सिर्फ दिखावे के लिए? शहादतनगर में मनमानी कीमत वसूली के आरोपों से मचा हड़कंप#
#हरदोई: पिहानी- एमआरपी सिर्फ दिखावे के लिए? शहादतनगर में मनमानी कीमत वसूली के आरोपों से मचा हड़कंप#
#हरदोई: पिहानी- एक ओर सरकार उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए लगातार नियम-कानून बना रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर इन नियमों की अनदेखी होने के आरोप सामने आ रहे हैं। पिहानी कोतवाली क्षेत्र के शहादतनगर स्थित गुड्डू मिष्ठान भण्डार पर उपभोक्ताओं से पैकेटबंद खाद्य पदार्थों को अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक कीमत पर बेचने के आरोप लगे हैं। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है बल्कि संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है#
#स्थानीय लोगों का आरोप है कि दुकान पर लंबे समय से निर्धारित मूल्य से अधिक रकम वसूली जा रही है। एक जागरूक उपभोक्ता ने जब दुकानदार से एमआरपी से अधिक पैसे लेने का कारण पूछा, तो आरोप है कि उसे संतोषजनक जवाब देने के बजाय बातों में उलझाने का प्रयास किया गया#
#क्षेत्र के लोगों का कहना है कि आखिर सरकार द्वारा तय किए गए नियम केवल कागजों तक ही सीमित हैं या उनका पालन भी कराया जाएगा? यदि किसी दुकान पर खुलेआम एमआरपी से अधिक कीमत वसूली जा रही है, तो संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था कहां है#
#स्थानीय नागरिकों के अनुसार, कई बार शिकायतें और चर्चाएं होने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं दिख रहा है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी क्षेत्र में नियमित निरीक्षण करते हैं या फिर उपभोक्ताओं को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है#
#उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि कोई गरीब या सामान्य ग्राहक कुछ रुपये अधिक देने पर मजबूर हो रहा है, तो यह छोटी बात नहीं है। हजारों ग्राहकों से प्रतिदिन थोड़ी-थोड़ी अतिरिक्त वसूली भी बड़ी रकम में बदल सकती है। ऐसे मामलों में खाद्य सुरक्षा विभाग, बाट-माप विभाग और प्रशासन की सक्रियता अपेक्षित होती है#
#क्षेत्रीय लोगों ने मांग की है कि संबंधित विभाग दुकान की जांच कर यह स्पष्ट करे कि क्या वास्तव में एमआरपी से अधिक मूल्य वसूला जा रहा है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए ताकि अन्य दुकानदारों को भी स्पष्ट संदेश मिल सके कि उपभोक्ताओं के अधिकारों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा#
#सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या जिम्मेदार अधिकारी शिकायतों और चर्चाओं का संज्ञान लेकर कार्रवाई करेंगे, या फिर उपभोक्ता शोषण के आरोप यूं ही लगते रहेंगे और व्यवस्था मूकदर्शक बनी रहेगी#
#वर्णित आरोप स्थानीय उपभोक्ताओं और क्षेत्रीय लोगों द्वारा लगाए गए हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी#

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