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#हरदोई:- में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती/ क्या विक्रम पाण्डेय दिला पाएंगे खोई हुई साख#


#हरदोई:- में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती/ क्या विक्रम पाण्डेय दिला पाएंगे खोई हुई साख#

#हरदोई: जनपद में कांग्रेस का विधानसभा चुनावों में प्रदर्शन पिछले दो दशकों से लगातार निराशाजनक रहा है। पार्टी ने समय-समय पर जिलाध्यक्ष बदले, आंदोलन किए और विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए, लेकिन इनका चुनावी नतीजों पर कोई खास असर दिखाई नहीं दिया। परिणामस्वरूप कांग्रेस पिछले 20 वर्षों में जिले की एक भी विधानसभा सीट जीतने में सफल नहीं हो सकी#

#राजनीतिक गलियारों में अक्सर यह चर्चा भी होती रही है कि कांग्रेस को सबसे अधिक नुकसान उसकी आंतरिक गुटबाजी ने पहुंचाया। ऐसे में पार्टी नेतृत्व ने इस बार विक्रम पाण्डेय को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि संगठन को मजबूत कर आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी का खाता खुल सके#

#हालांकि, विक्रम पाण्डेय के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं। कांग्रेस के कई फ्रंटल संगठनों के पदाधिकारी या तो जिले से बाहर रहते हैं या फिर पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका नहीं निभाते। अल्पसंख्यक विभाग समेत कई प्रकोष्ठों में ऐसे पदाधिकारी भी हैं, जिनका क्षेत्र में प्रभाव और जनाधार बेहद सीमित माना जाता है#

#ऐसे में नए जिलाध्यक्ष को निष्क्रिय पदाधिकारियों की समीक्षा कर सक्रिय कार्यकर्ताओं को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देनी होंगी। साथ ही बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना और नए कार्यकर्ताओं को जोड़ना भी उनकी प्राथमिकता होगी। विधानसभा चुनाव में अब अधिक समय नहीं बचा है, इसलिए संगठन विस्तार और सक्रियता दोनों पर तेजी से काम करना होगा#

#इसके अलावा कांग्रेस के भीतर लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी को समाप्त कर सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाना भी विक्रम पाण्डेय के लिए बड़ी परीक्षा होगी। यदि संगठन एकजुट होता है तो पार्टी चुनाव में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर सकती है#

#अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विक्रम पाण्डेय हरदोई में कांग्रेस की खोई हुई राजनीतिक साख वापस दिला पाएंगे, या फिर पिछले दो दशकों की तरह कांग्रेस एक बार फिर जिले में बिना विधायक वाली पार्टी बनकर रह जाएगी? इसका जवाब आने वाले विधानसभा चुनाव के नतीजे ही देंगे#

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