#सीतापुर:- नैमिषारण्य- श्रावण के दूसरे सोमवार से पहले व्यवस्था पर सवाल! अंधेरे में कांवड़ यात्रा को मजबूर होंगे शिवभक्त, देवदेवेश्वर धाम के सामने भी घोर अंधकार#
#सीतापुर:- नैमिषारण्य- श्रावण के दूसरे सोमवार से पहले व्यवस्था पर सवाल! अंधेरे में कांवड़ यात्रा को मजबूर होंगे शिवभक्त, देवदेवेश्वर धाम के सामने भी घोर अंधकार#
#नैमिषारण्य: पवित्र श्रावण मास का द्वितीय सोमवार कल है। महादेव की भक्ति में डूबे हजारों कांवड़िए आज रविवार की रात से ही पावन धाम नैमिषारण्य स्थित बाबा देवदेवेश्वर मंदिर के समीप आदि गंगा गोमती का दिव्य जल लेकर विभिन्न शिवालयों की ओर कांवड़ यात्रा पर निकलेंगे। श्रद्धालुओं में बाबा भोलेनाथ के प्रति अटूट आस्था और भक्ति का उत्साह है, लेकिन इसी बीच कांवड़ यात्रा मार्ग पर प्रकाश व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं#
#हर वर्ष की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में शिवभक्त नैमिषारण्य पहुंच रहे हैं और गोमती के पावन जल को कांवड़ में लेकर बाबा श्यामनाथ मंदिर, कैलाशन, गोला गोकर्णनाथ सहित विभिन्न शिव मंदिरों में जलाभिषेक के लिए रवाना होंगे। रविवार की पूरी रात कांवड़ियों की पदयात्रा जारी रहेगी। ऐसे में मार्ग पर पर्याप्त रोशनी होना श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए बेहद जरूरी है#
#लेकिन हरदोई-सीतापुर मार्ग पर कई स्थानों पर अंधेरा ही अंधेरा नजर आ रहा है। प्रशासन द्वारा प्रकाश व्यवस्था के लिए लाइटें लगाए जाने की कवायद भले ही दिखाई दे रही हो, लेकिन कई स्थानों पर यह व्यवस्था महज औपचारिकता बनती नजर आ रही है। सबसे गंभीर स्थिति बाबा देवदेवेश्वर मंदिर के प्रवेश द्वार के निकट स्थित आश्रम शिव शक्ति धाम के सामने बताई जा रही है, जहां घोर अंधकार श्रद्धालुओं के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है#
#आश्रम के महंत सुरेश दास ने व्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस समस्या की जानकारी कई बार सीतापुर जनपद के अधिकारियों और संबंधित विभाग के कर्मचारियों को दी जा चुकी है। इसके बावजूद प्रकाश व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई#
#महंत सुरेश दास ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब कांवड़ यात्रा में हजारों श्रद्धालु रातभर पैदल यात्रा करते हैं, तो ऐसे संवेदनशील मार्गों पर पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है? क्या पिछली वर्ष की तरह इस बार भी श्रद्धालु अंधेरे में ही यात्रा करने और विश्राम करने को मजबूर होंगे#
#श्रद्धालुओं का कहना है कि कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि करोड़ों सनातन श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा पवित्र पर्व है। ऐसे में यात्रा मार्ग पर रोशनी, पेयजल, साफ-सफाई, सुरक्षा और विश्राम जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करने के साथ-साथ उनकी सुरक्षा के लिए भी चुनौती बन सकती है#
#निरीक्षणों के बावजूद धरातल पर व्यवस्थाएं क्यों नाकाफी#
#सबसे बड़ा सवाल यह है कि कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले पवित्र धाम नैमिषारण्य में श्रद्धालुओं की सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जनपद के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा लगातार निरीक्षण किए जा रहे हैं। बैठकों और निरीक्षणों में व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश भी दिए जाते हैं, लेकिन जब हजारों श्रद्धालु सड़कों पर निकलते हैं तो धरातल पर कई व्यवस्थाएं नाकाफी क्यों साबित होती हैं#
#यदि अधिकारियों को पहले से मालूम है कि रविवार की रात हजारों कांवड़िए अंधेरे में पैदल यात्रा करेंगे, तो फिर ऐसे स्थानों को चिन्हित कर समय रहते प्रकाश की समुचित व्यवस्था क्यों नहीं की गई? यह सवाल अब श्रद्धालुओं के साथ-साथ स्थानीय लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है#
#भोले की भक्ति में निकले श्रद्धालुओं को मिले सुरक्षित रास्ता#
#कांवड़िए हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष के साथ पवित्र गोमती जल लेकर लंबी दूरी तय करेंगे। उनके लिए यह यात्रा तपस्या, आस्था और भगवान शिव के प्रति समर्पण का प्रतीक है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी है कि श्रद्धालुओं को अंधेरे, अव्यवस्था और असुविधा के बीच यात्रा करने के लिए मजबूर न होना पड़े#
#श्रद्धालुओं और स्थानीय संतों ने प्रशासन से मांग की है कि कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले हरदोई-सीतापुर मार्ग के उन सभी स्थानों को तत्काल रोशन कराया जाए, जहां अंधेरा व्याप्त है। विशेष रूप से देवदेवेश्वर धाम के प्रवेश द्वार और शिव शक्ति धाम आश्रम के सामने पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि दूर-दराज से आने वाले शिवभक्त सुरक्षित एवं सुविधाजनक ढंग से अपनी धार्मिक यात्रा पूरी कर सकें#
#आस्था के इस महासैलाब में प्रशासन की परीक्षा भी होगी। अब देखना यह है कि निरीक्षणों और दावों के बीच आज रात हजारों कांवड़ियों को रोशनी से जगमगाता सुरक्षित मार्ग मिलता है या फिर बाबा भोलेनाथ के भक्त एक बार फिर अंधेरे के सहारे अपनी आस्था की कठिन यात्रा पूरी करने को मजबूर होते हैं#

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