#गौतमबुद्धनगर:- सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर समझौते से मुकदमे निपटाने का मामला, यमुना सीईओ ने प्राधिकरण हितों को लेकर कही खरी खरी#
#गौतमबुद्धनगर:- सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर समझौते से मुकदमे निपटाने का मामला, यमुना सीईओ ने प्राधिकरण हितों को लेकर कही खरी खरी#
#गौतमबुद्धनगर: न्यायिक अधिकारियों और प्राधिकरणों के शीर्ष अधिकारियों के बीच समझौते से मुकदमों के निपटारे को लेकर हुई बैठक में एक ऐसा वाकया हुआ जिसे देखकर कोई भी प्रशासनिक अधिकारियों पर गर्व कर सकता है। दरअसल यह बैठक सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जिला जज की अध्यक्षता में आयोजित की गई थी। इसमें ग्रेटर नोएडा व यमुना प्प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी व नोएडा के अन्य शीर्ष अधिकारी उपस्थित हुए थे। बैठक का विषय था सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर तीनों प्राधिकरणों से संबंधित लगभग 210 मुकदमों को आपसी समझौते से निपटाने का। हालांकि न्यायिक अधिकारियों को प्राधिकरणों के रुख का पहले से पता था और प्रत्येक मुकदमे में वित्तीय हितों को दांव पर लगाने के लिए कोई अधिकारी तैयार भी नहीं था। फिर भी सुप्रीम कोर्ट और राज्य सरकार के निर्देश पर यह बैठक आयोजित की गई। न्यायिक अधिकारियों ने प्राधिकरणों के अधिकारियों से फिर वही समझौतों से मुकदमों को निपटाने के लिए कहा। इनमें एक मुकदमा नारसल ( नेशनल असेट्स रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड)का जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड की एक संपत्ति को लेकर भी है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड की 57000 करोड़ रुपए की विवादित संपत्तियों को नारसल को सौंप दिया था। इनमें एक संपत्ति यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के प्रस्तावित ट्रांसपोर्ट हब में 15 हेक्टेयर भूमि भी है।नारसल ने इस भूमि का भू उपयोग व्यवसायिक कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यमुना प्राधिकरण के विरुद्ध मुकदमा दायर किया हुआ है। बैठक में यमुना प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी राकेश कुमार सिंह अपने प्राधिकरण से संबंधित सभी मुकदमों के दस्तावेज लेकर पूरी तैयारी से आए थे। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों से पूछा कि ट्रांसपोर्ट नगर की तीस हजार रुपए वर्गमीटर की भूमि को सत्तर हजार रुपए वर्गमीटर कीमत की भूमि में किस प्रकार बदला जा सकता है। क्या इससे प्राधिकरण के आर्थिक हितों को नुक्सान नहीं होगा? उन्होंने कहा कि वे प्राधिकरण का यह नुकसान नहीं होने देंगे। अन्य मामलों में भी उन्होंने इसी प्रकार प्राधिकरण के हितों से समझौता न करने की बात कही। उनके तर्कों, दस्तावेजों तथा प्राधिकरण के हितों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को देख सुनकर न्यायिक अधिकारी निरुत्तर हो गए#

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