#गौतमबुद्धनगर:- किसान नेताओं ने निकाली तिरंगा यात्रा, पहुंचे प्राधिकरणों के द्वार#
#गौतमबुद्धनगर:- किसान नेताओं ने निकाली तिरंगा यात्रा, पहुंचे प्राधिकरणों के द्वार#
#गौतमबुद्धनगर: भाजपा नीत केंद्र सरकार और भाजपा शासित राज्य सरकारों के आह्वान पर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर निकाली जा रही तिरंगा यात्राओं का उद्देश्य क्या है? सरकारों का उद्देश्य चाहे जो हो, किसान नेताओं का एकमात्र उद्देश्य जनपद गौतमबुद्धनगर में कार्यरत तीनों औद्योगिक विकास प्राधिकरणों तक पहुंचना है।कल बुधवार को भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के स्थानीय सिपहसालारों ने दो स्थानों पर तिरंगा यात्रा का आयोजन किया। एक यात्रा ग्रेटर नोएडा में लगभग एक किलोमीटर चलकर यमुना प्राधिकरण के परिसर तक पहुंच कर संपन्न हो गई। दूसरी यात्रा भी लगभग इतनी ही दूरी तक चली और नोएडा प्राधिकरण के सेक्टर 96 स्थित नये मुख्यालय पर पहुंच गई। कालजई हिंदी फिल्म 'दोस्ती' का एक प्रसिद्ध गीत है,'मेरा तो जो भी कदम है, तेरी राह में है ।' किसान नेता किसानों से संबंधित मांगों को लेकर रैली निकालें या तिरंगा यात्रा,उनका गंतव्य प्राधिकरण ही हैं। चूंकि तिरंगा यात्राओं का आह्वान सरकारी है तो कल किसान नेताओं द्वारा आयोजित तिरंगा यात्राओं को पुलिस सुरक्षा का भी पूरा कवच मिला। दरअसल जनपद गौतमबुद्धनगर में तीन महत्वपूर्ण औद्योगिक विकास प्राधिकरणों की उपस्थिति से यहां पांच दर्जन से अधिक किसान संगठनों की उत्पत्ति हो गई है। कानों-कान खबर रखने वाले एक सज्जन का दावा है कि यमुना प्राधिकरण के एक अकेले गांव में राष्ट्रीय स्तर के 11 किसान संगठन बने हुए हैं। गांव की आबादी इन संगठनों के पदाधिकारियों की संख्या से कम है। सभी संगठनों की मांगों में अभूतपूर्व समानता है।ये संगठन किसानों की आबादी,बैक लीज और कोटे के भूखंड देने की मांग करते हैं और अपने निजी लाभ के कामों की पैरवी करते हैं। इनमें से कई किसान नेताओं ने तालाब और सरकारी भूमि पर कब्जा कर अपनी अट्टालिकाएं खड़ी कर रखी हैं।प्राधिकरणों में इन संगठनों की धमक आसानी से सुनी जा सकती है क्योंकि अधिकारी भी अपने निजी लाभ के कामों के अतिरिक्त कुछ नहीं कर रहे हैं। जहां तक किसानों का प्रश्न है तो उनका कुछ होता दिखाई नहीं देता।जब भी कभी किसी किसान नेता को अपने प्रभाव में कमी दिखाई देती है या समर्थकों में प्रासंगिकता का अभाव खटकने लगता है तो रैली या यात्रा का आयोजन कर दिया जाता है। तिरंगा यात्रा के लिए तो किसी अनुमति की भी आवश्यकता नहीं है। प्राधिकरणों पर पहुंचकर किसान नेता संभवतः प्रसिद्ध हिन्दी फिल्म 'बगावत' के गीत की यही पंक्तियां गाते हैं,'पहचान ये निगाहें,ये आंसू और ये आहें#

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