Breaking News

#हरदोई:- अखिलेश यादव के साथ राजाबख्श सिंह की तस्वीर से हरदोई की सियासत में हलचल#


#हरदोई:- अखिलेश यादव के साथ राजाबख्श सिंह की तस्वीर से हरदोई की सियासत में हलचल#

#हरदोई: लखनऊ में आयोजित शिक्षक सम्मान कार्यक्रम में सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ हरदोई सदर से भाजपा के पूर्व प्रत्याशी राजा बख्श सिंह की मौजूदगी ने जिले की सियासत में चर्चाओं को तेज कर दिया है। कार्यक्रम की तस्वीर सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में राजा बख्श सिंह के अगले सियासी कदम को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि राजा बख्श सिंह की ओर से अभी तक समाजवादी पार्टी में शामिल होने या आगामी विधानसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी बनने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में फिलहाल इस मुलाकात को किसी राजनीतिक निर्णय का संकेत मानना जल्दबाजी होगी#

#2017 में भाजपा के टिकट पर दी थी कड़ी चुनौती#

#राजा बख्श सिंह की राजनीतिक ताकत का अंदाजा वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव परिणाम से लगाया जा सकता है। भाजपा प्रत्याशी के रूप में उन्होंने 92,626 वोट हासिल किए थे, जबकि सपा प्रत्याशी नितिन अग्रवाल को 97,735 वोट मिले थे। दोनों के बीच जीत का अंतर महज 5,109 वोट रहा था। खास बात यह थी कि उस दौर में हरदोई सदर सीट को लंबे समय से अग्रवाल परिवार के प्रभाव वाली सीट माना जाता था। ऐसे राजनीतिक समीकरण के बीच भाजपा के राजा बख्श सिंह का 92 हजार से अधिक वोट हासिल करना अपने आप में महत्वपूर्ण प्रदर्शन माना गया#

#क्षत्रिय वोट और व्यक्तिगत जनाधार पर चर्चा#

#राजनीतिक चर्चाओं में राजा बख्श सिंह को क्षत्रिय समाज के बीच मजबूत पकड़ रखने वाला नेता बताया जाता है। समर्थकों का दावा है कि यदि वह भविष्य में किसी नए राजनीतिक मंच से सदर विधानसभा सीट पर चुनाव मैदान में उतरते हैं, तो उनके व्यक्तिगत प्रभाव का चुनावी समीकरण पर असर पड़ सकता है। हालांकि 2017 में मिले 92 हजार से अधिक वोटों को किसी एक जाति या समुदाय के समर्थन के रूप में देखना उचित नहीं होगा। चुनाव परिणाम यह जरूर संकेत देता है कि उस समय उन्हें विभिन्न वर्गों से पर्याप्त समर्थन मिला था#

#क्या भाजपा के वोट बैंक पर पड़ेगा असर#

#अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि भविष्य में राजा बख्श सिंह और सपा के बीच कोई राजनीतिक समीकरण बनता है, तो क्या इसका असर भाजपा के परंपरागत मतदाताओं पर पड़ेगा? खासकर क्षत्रिय मतदाताओं के बीच उनकी व्यक्तिगत पकड़ को लेकर चर्चाएं तेज हैं। वहीं, उनके समर्थक यह मानते हैं कि राजा बख्श सिंह की पहचान केवल एक पार्टी प्रत्याशी तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनका अपना व्यक्तिगत जनाधार भी है। आने वाला समय ही बताएगा कि यह मुलाकात महज शिष्टाचार तक सीमित रहती है या फिर हरदोई की सियासत में किसी बड़े बदलाव की भूमिका तैयार करती है#

No comments