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#हरदोई:- संडीला- एकपक्षीय आदेश निरस्त कराने की अर्जी खारिज, नोटिस तामील का रिकॉर्ड मिला#


#हरदोई:- संडीला- एकपक्षीय आदेश निरस्त कराने की अर्जी खारिज, नोटिस तामील का रिकॉर्ड मिला#

#हरदोई: संडीला- राजस्व न्यायालय ने एकपक्षीय आदेश और उसके बाद हुई बंटवारा कार्यवाही को चुनौती देने वाली अर्जी खारिज कर दी। संयुक्त मजिस्ट्रेट/उप जिलाधिकारी सण्डीला नारायणी भाटिया ने सुनवाई के दौरान पाया कि संबंधित पक्ष को मुकदमे की सूचना देने और बंटवारे पर आपत्ति दाखिल करने का अवसर दिए जाने के अभिलेख पत्रावली में मौजूद हैं। ऐसे में केवल जानकारी न होने का दावा आदेश निरस्त करने का पर्याप्त आधार नहीं है#

#मामला मुकुन्द राम पुत्र चुन्नीलाल निवासी काशीनगर पतसेनी कछौना से जुड़ा है। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा 117 के तहत चल रहे वाद में मुकुन्द राम ने स्वयं को मूल वाद का प्रतिवादी संख्या-1 बताते हुए अर्जी दाखिल की थी। उसका कहना था कि उसे कोई सम्मन या नोटिस नहीं मिला और सात अक्टूबर 2021 को उसके विरुद्ध एकपक्षीय आदेश पारित कर दिया गया। इसके बाद बंटवारा संबंधी कागजात तैयार किए जाने की जानकारी भी उसे नहीं दी गई, जिससे वह आपत्ति दाखिल नहीं कर सका#

#प्रार्थी ने सात अक्टूबर 2021 के आदेश, लेखपाल की दो जुलाई 2022 की बंटवारा रिपोर्ट और 19 मार्च 2025 के आदेश को निरस्त कर मामले का नए सिरे से साक्ष्य के आधार पर निस्तारण कराने की मांग की थी। साथ ही देरी को माफ करने के लिए परिसीमा अधिनियम की धारा-5 के तहत भी प्रार्थना पत्र दिया गया था#

#विपक्षी पक्ष ने अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि संबंधित पक्ष को विधिवत सूचना देने के बाद ही सात अक्टूबर 2021 का आदेश पारित किया गया था। बंटवारा कागजात तैयार होने से पहले भी उसे आपत्ति दाखिल करने का अवसर दिया गया, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुआ। विपक्षियों ने यह भी कहा कि प्रार्थी स्वयं विवादित भूमि में अपने आधे हिस्से को स्वीकार कर चुका है और वर्ष 2021 के आदेश में भी उसके पक्ष में एक-आधा अंश निर्धारित किया गया था#

#दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और मूल पत्रावली का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने पाया कि प्रार्थी को बंटवारा संबंधी आपत्ति दाखिल करने के लिए सम्मन के जरिए तलब किया गया था। पत्रावली में नोटिस की तामील से संबंधित अभिलेख भी मौजूद थे। न्यायालय ने कहा कि इन अभिलेखों को गलत साबित करने के लिए प्रार्थी कोई ठोस और विश्वसनीय दस्तावेज पेश नहीं कर सका#

#न्यायालय ने यह भी पाया कि सात अक्टूबर 2021 के आदेश में पक्षकारों के अंश का निर्धारण किया गया था और प्रार्थी का एक-आधा हिस्सा स्वीकार किया गया। प्रार्थी ने अपनी अर्जी में भी इस हिस्से को स्वीकार किया है। वह यह स्पष्ट नहीं कर सका कि वर्ष 2021 के आदेश में ऐसी कौन सी गंभीर तथ्यात्मक या कानूनी त्रुटि हुई, जिसके आधार पर आदेश को निरस्त किया जाना जरूरी हो#

#बंटवारा कार्यवाही पर उठाई गई आपत्तियों को भी न्यायालय ने पर्याप्त नहीं माना। प्रार्थी यह नहीं बता सका कि किस गाटा या खसरे में क्या गलती हुई अथवा उसके वैध हिस्से के विपरीत किस प्रकार विभाजन किया गया। न्यायालय ने माना कि केवल सामान्य रूप से बंटवारा गलत होने का आरोप लगाने से पूरी कार्यवाही को अवैध नहीं माना जा सकता#

#सात अक्टूबर 2021 और 19 मार्च 2025 के आदेशों को चुनौती देने के लिए 13 जनवरी 2026 को अर्जी दाखिल की गई थी। न्यायालय ने माना कि आदेशों की तारीख और अर्जी दाखिल करने के बीच पर्याप्त देरी हुई। धारा-5 के तहत देरी माफी की मांग के बावजूद प्रार्थी देरी की प्रत्येक अवधि का संतोषजनक और ठोस कारण नहीं बता सका। न्यायालय ने कहा कि देरी की माफी स्वतः नहीं की जा सकती, इसके लिए पर्याप्त कारण स्पष्ट करना जरूरी है#

#समस्त तथ्यों और पत्रावली के परीक्षण के बाद एसडीएम नारायणी भाटिया ने प्रार्थी की अर्जी को तथ्यात्मक और कानूनी आधार से रहित माना। न्यायालय ने सात अक्टूबर 2021 और 19 मार्च 2025 के आदेशों में हस्तक्षेप का कोई पर्याप्त आधार नहीं पाया। अर्जी को बलहीन एवं विधिक रूप से पोषणीय न होने के कारण खारिज कर दिया गया#

#न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि यदि वाद में कोई स्थगन आदेश प्रभावी हो तो उसे निरस्त किया जाए। आदेश की प्रति तहसीलदार सण्डीला अमित यादव को भेजने और आवश्यक कार्रवाई के बाद पत्रावली दाखिल दफ्तर करने के निर्देश दिए गए। जहाँ उपरोक्त आदेश के बाबत नीरज शुक्ल व दुर्गेश शुक्ल आदि ने खुशी जताते हुए संडीला न्यायालय का आभार व्यक्त किया#

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